100 से अधिक कॉलेजों की लापरवाही से अटके नतीजे, डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लगाएगा 50-50 हजार का जुर्माना
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संवाद 24 संवाददाता। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध 100 से अधिक कॉलेजों की लापरवाही हजारों छात्रों पर भारी पड़ रही है। स्नातक और परास्नातक विषम सेमेस्टर की प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक अंतिम तिथि तक ऑनलाइन दर्ज न किए जाने के कारण कई पाठ्यक्रमों के परिणाम अटक गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐसे प्रत्येक कॉलेज पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, गुरुवार को प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक दर्ज करने की अंतिम तिथि थी, लेकिन इसके बावजूद 100 से अधिक कॉलेजों ने न तो प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराईं और न ही उनके अंक पोर्टल पर अपलोड किए।
इसका सीधा असर परिणाम प्रक्रिया पर पड़ा है। जिन पाठ्यक्रमों का लिखित मूल्यांकन पूरा हो चुका है, उनके परिणाम भी प्रयोगात्मक अंकों के अभाव में जारी नहीं हो पा रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत संचालित स्नातक स्तर के बीए, बीएससी, बीकॉम प्रथम, तृतीय व पंचम सेमेस्टर और परास्नातक स्तर के एमए, एमएससी, एमकॉम प्रथम व तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाएं 22 दिसंबर को समाप्त हो चुकी थीं। परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने 15 दिसंबर से खंदारी परिसर और संस्कृति भवन स्थित छह मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी शुरू करा दिया था।
करीब दो लाख छात्रों की 12 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाना है। अब तक मेजर विषयों की लगभग 80 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा हो चुका है, जबकि माइनर विषयों का मूल्यांकन केवल 40 प्रतिशत ही हो पाया है। जिन पाठ्यक्रमों में केवल मेजर विषय हैं, उनके परिणाम जारी किए जा सकते हैं, लेकिन प्रयोगात्मक परीक्षाएं न होने से अधिकांश पाठ्यक्रमों के परिणाम रुके हुए हैं।
विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को पहले 31 दिसंबर तक प्रयोगात्मक परीक्षा कराने और अंक दर्ज करने का समय दिया था। इसके बाद तिथि बढ़ाकर 10 जनवरी और फिर अंतिम अवसर के रूप में 15 जनवरी तय की गई, लेकिन इसके बावजूद कई कॉलेजों ने न तो शिक्षकों को परीक्षा के लिए बुलाया और न ही मौखिक व प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक ऑनलाइन दर्ज किए।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि कॉलेजों को दो बार अतिरिक्त अवसर दिया जा चुका है। इसके बाद भी जो कॉलेज प्रयोगात्मक परीक्षा के अंक दर्ज नहीं कर पाए हैं, उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय से कॉलेज प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं छात्र जल्द परिणाम जारी होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।






