लोकसभा-विधानसभा में भगवाधारी अच्छे नहीं लगते’ जगदगुरु शंकराचार्य की दो टूक, कहा: भगवा पहनकर चुनाव लड़ना बना फैशन
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर हाउस स्थित ब्रज प्रांत कार्यालय माधव भवन के पुनर्निर्मित भवन का लोकार्पण शुक्रवार को गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज, संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल सहित अनेक राष्ट्रीय पदाधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जहां संगठनात्मक और वैचारिक विमर्श हुआ, वहीं जगदगुरु शंकराचार्य के स्पष्ट और तीखे वक्तव्य ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने भगवा वस्त्र धारण कर चुनाव लड़ने की प्रवृत्ति पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभा में बैठे भगवाधारी अच्छे नहीं लगते। उन्होंने कहा कि आज भगवा पहनकर चुनाव लड़ना एक फैशन बन गया है। बैंक, रजिस्ट्री कार्यालय की लाइन हो या फिर विधानसभा-लोकसभा, जब वहां भगवा वस्त्रों में लोग दिखाई देते हैं तो शर्म महसूस होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को चुनाव लड़ने के लिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है, तो भगवा धारण करने वालों को भी राजनीति में आने से पहले यही त्याग करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि संघ से भाजपा में गए कुछ लोगों को भी “हवा लग गई है।” उनके इस बयान को धर्म और राजनीति की मर्यादा को लेकर एक गंभीर संदेश के रूप में देखा गया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बेबी रानी मौर्य को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे आगे और भी बड़ी भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने आगरा और उसके आसपास के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीते एक हजार वर्षों में इस क्षेत्र में अनेक ऐसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण कार्य हुए हैं, जिन्हें आज लोग भूलते जा रहे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज, गोकुलाजाट और राणा सांगा जैसे महान योद्धाओं की स्मृति में स्मारक और संग्रहालय बनाए जाने चाहिए, ताकि पर्यटक ताजमहल के साथ-साथ भारत के शौर्य और बलिदान से भी परिचित हो सकें।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि आगरा के लोग ही अपने इतिहास को भूलते जा रहे हैं। अपनी असाधारण चतुराई और रणनीति से छत्रपति शिवाजी महाराज औरंगजेब की कैद से आगरा से मुक्त हुए। यह घटना पूरे विश्व के लिए शोध का विषय हो सकती है, लेकिन दुर्भाग्यवश हम इसे एक स्मारक के रूप में विकसित नहीं कर पाए। उन्होंने फव्वारा चौराहे स्थित कोतवाली पर गोकुलाजाट और फतेहपुर सीकरी में राणा सांगा द्वारा मुगल बादशाह के विरुद्ध धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान का भी स्मरण कराया।
उन्होंने यह भी कहा कि आगरा के निकट वृंदावन, गोकुल और गोवर्धन में भक्ति आंदोलन के माध्यम से साधु-संतों और सनातनियों ने जो त्याग और संघर्ष किया, उसे समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। माधव भवन में ऐसी शोध व्यवस्था विकसित की जाएगी, जो उस कालखंड से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखे और वर्तमान समाज के सामने भारत के गौरवशाली इतिहास को उजागर करे।
अपने संबोधन में जगदगुरु शंकराचार्य ने कहा कि संघ पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठने वाले प्रश्नों का उत्तर भावनात्मक नहीं, बल्कि बौद्धिक स्तर पर दिया जाना चाहिए। माधव भवन को केवल एक औपचारिक केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा अध्ययनशील केंद्र बनना चाहिए, जहां से समाज को ठोस और तर्कसंगत उत्तर दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि ज्ञानवान कार्यकर्ता ही विधर्मियों को करारा जवाब दे सकते हैं, क्योंकि चिंतन और विमर्श की सशक्त परंपरा केवल सनातन के पास है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, अखिल भारतीय गोसंयोजक अजीत महापात्रा, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद सहित राकेश जैन, दिनेश उपाध्याय भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने किया, परिचय केशव शर्मा ने कराया और धन्यवाद ज्ञापन विजय गोयल ने दिया।
माधव भवन के लोकार्पण के साथ यह कार्यक्रम केवल एक भवन उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धर्म, राजनीति, इतिहास और बौद्धिक चेतना पर गहन विमर्श का मंच बनकर उभरा।






