2000 किलोमीटर के श्रीराम वन गमन पथ पर सोलो राइडर की ऐतिहासिक यात्रा, संत प्रेमानंद का मिला आशीर्वाद
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संवाद 24 संवाददाता। त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान जिस मार्ग से चलते हुए लंका में रावण का वध किया, उसी पावन श्रीराम वन गमन पथ पर हजारों वर्षों बाद एक आधुनिक यात्री ने कदम बढ़ाए हैं। आगरा के सोलो राइडर डॉ. मुकेश चौहान ने इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत बुलेट बाइक से की है। वे लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी 75 दिनों में तय करेंगे। यह यात्रा आगरा से अयोध्या होते हुए श्रीलंका तक जाएगी और वापसी में अयोध्या पहुंचकर सम्पन्न होगी।
शुक्रवार सुबह आगरा में जय श्रीराम के उद्घोष के बीच आगरवासियों ने डॉ. चौहान को भव्य स्वागत और शुभकामनाओं के साथ रवाना किया। डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित सेठ पदमचंद जैन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आशु रानी ने इस दुर्गम और प्रेरणादायी यात्रा के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
इससे पूर्व शुक्रवार तड़के चार बजे वृंदावन स्थित अपने आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज ने डॉ. मुकेश चौहान को आशीर्वाद प्रदान किया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह के दौरान डॉ. चौहान ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज देश की सबसे गहरी और पीड़ादायक समस्या जातिवाद है, जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करती है, जबकि भारतीय संस्कृति सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती रही है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल में न ऊँच-नीच देखी, न जाति और न ही वर्ग। केवट, शबरी, निषादराज और ऋषि-मुनियों के साथ उनका व्यवहार समान, करुणामय और सम्मानपूर्ण था। श्रीराम ने कर्म, भक्ति और मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया। आज जब समाज जाति के नाम पर बंटता जा रहा है, तब श्रीराम वन गमन पथ की यह यात्रा समाज को जोड़ने का कार्य कर रही है।
डॉ. चौहान ने कहा कि यह यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि हमारी पहचान जाति से नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा और चरित्र से होती है। यात्रा संयोजक नवीन अग्रवाल ने बताया कि जैसे लाखों श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की सात कोस की परिक्रमा या ब्रज की 84 कोस की यात्रा कर भगवान कृष्ण के सान्निध्य का अनुभव करते हैं, उसी तरह श्रीराम वन गमन पथ यात्रा भगवान श्रीराम के पदचिन्हों को स्पर्श करने का एक आधुनिक माध्यम है।
अयोध्या से लंका तक की यह सोलो राइड सनातन संस्कृति के प्रति नई जागृति और चेतना का शंखनाद है। इस यात्रा में चित्रकूट तक डॉ. मुकेश चौहान के साथ डॉ. बीएस चौहान और डॉ. सीपी गुप्ता भी सहभागी होंगे। शुभारंभ कार्यक्रम में डॉ. मुकेश गोयल, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. ब्रजेश रावत, डॉ. शरद गुप्ता, डॉ. संदीप जैन, प्रदीप पुरी, गुलशन बुद्धिराजा, पंकज गुप्ता, साइकिलिस्ट प्रमोद कटारा, देवायानी सिंह, लवी चौहान, लवली चौहान सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह यात्रा न केवल एक भौगोलिक सफर है, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रेरक प्रयास भी है।






