लद्दाख की वो खौफनाक रात जब बर्फ पिघलाकर पीया पानी और उम्मीद के सहारे बची ज़िंदगी
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संवाद 24 संवाददाता। लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में फंसे चार दोस्तों के लिए हर गुजरता पल मौत और जिंदगी के बीच जंग जैसा था। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे, चारों ओर बर्फ का सैलाब और मदद की कोई उम्मीद नहीं। उस रात को याद करते ही युवकों की आवाज भर्रा जाती है। आंखों में डर, लेकिन चेहरे पर सुकून—क्योंकि वे अब सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।
गुरुवार रात जैसे ही चारों दोस्त घर पहुंचे, माहौल भावनाओं से भर गया। परिवार के लोग गले लगकर रो पड़े। जब युवकों ने अपनी आपबीती सुनाई तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। पानी खत्म हो चुका था। ऐसे में उन्होंने कार के हीटर और साथ लाए छोटे चूल्हे की मदद से बर्फ पिघलाई और वही पानी पीकर खुद को जिंदा रखा। भूख मिटाने के लिए बिस्कुट और चिप्स ही उनका सहारा बने।
बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच वे घंटों मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन वहां उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। हर तरफ सन्नाटा और मौत की खामोशी थी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सुरक्षित जगह की तलाश में चारों दोस्त 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलते रहे। फिसलन भरी राहें, जमाने वाली ठंड और थकान—हर कदम पर खतरा था, फिर भी जज्बा टूटा नहीं।
अचानक जब दूर से भारतीय सेना और पुलिस की रेस्क्यू टीम दिखाई दी, तो मानो नई जिंदगी मिल गई। युवकों ने बताया कि उस पल आंखों से अपने आप आंसू निकल आए। लगा जैसे मौत के मुंह से कोई वापस खींच लाया हो।
मधुनगर के नरोत्तम कुंज निवासी प्रॉपर्टी डीलर शिवम चौधरी, उनके ममेरे भाई जयवीर सिंह (डायमंड सिटी, रोहता), दोस्त यश मित्तल (मधुनगर) और सुधांशु फौजदार (देवरी रोड) छह जनवरी को कार से लद्दाख घूमने निकले थे। नौ जनवरी को वे पैंगोंग झील पर थे। उसी दिन शिवम स्वजनों से वीडियो कॉल पर बात कर रहे थे कि अचानक नेटवर्क कट गया।
इसके बाद युवकों से कोई संपर्क नहीं हो सका। चिंतित स्वजनों ने 11 जनवरी को सदर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। सूचना मिलते ही सदर पुलिस और परिजनों के सहयोग से लद्दाख पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। मंगलवार को पांग-सरचू रोड पर विस्की नाला के पास चारों युवकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
गुरुवार रात 8:30 बजे चारों युवक अपने स्वजनों के साथ घर पहुंचे। यह सिर्फ एक वापसी नहीं थी, बल्कि मौत को मात देकर लौटने की कहानी थी—हिम्मत, दोस्ती और उम्मीद की कहानी।






