बुजुर्गों और मरीजों के लिए मदद की नई आवाज बनेगी स्मार्ट घड़ी स्विच दबाते ही पहुंचेगी सूचना
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संवाद 24 संवाददाता। अस्पतालों में अक्सर देखा जाता है कि मरीज मदद के लिए आवाज लगाता रहता है, लेकिन शोर या दूरी के कारण उसकी आवाज नर्स या वार्ड बॉय तक नहीं पहुंच पाती। इसी तरह फैक्ट्रियों में मशीन खराब होने या सेफ्टी अलर्ट के समय कर्मचारियों की सूचना तकनीकी स्टाफ तक देर से पहुंचती है। ऐसी ही गंभीर और रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान लेकर आए हैं पीएसआईटी के छात्र, जिन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्ट घड़ी विकसित की है।
इस स्मार्ट घड़ी की खासियत यह है कि मरीज या कर्मचारी जैसे ही बेड या मशीन से जुड़े स्विच को दबाता है, तुरंत घड़ी पहने संबंधित स्टाफ तक सूचना पहुंच जाती है। न सायरन की जरूरत, न शोर बस एक भरोसेमंद और शांत संकेत।
साउंड बेल का स्मार्ट और शांत विकल्प
पीएसआईटी स्टार्टअप इन्क्यूबेशन फाउंडेशन में इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप रमन रिसर्च एंड इनोवेशन द्वारा विकसित यह स्मार्ट घड़ी पारंपरिक साउंड बेल सिस्टम का आधुनिक विकल्प है। इस नवाचार का विचार अपर निदेशक रघुराज सिंह को अस्पतालों और दफ्तरों में स्टाफ कॉलिंग सिस्टम की खामियों को देखकर आया।
इसके बाद पीएसआईटी के छात्र राहुल कुमार, आर्य मिश्रा, रितिश कटियार और अनमोल दीप ने कंपनी के सीटीओ लवित्रा साहू और डायरेक्टर संदीप खरे के मार्गदर्शन में महज दो महीनों में इस विचार को व्यवहारिक उत्पाद का रूप दे दिया।
वाईफाई के साथ आरएफ तकनीक से भी काम
यह स्मार्ट घड़ी वाइब्रेशन और स्क्रीन नोटिफिकेशन के माध्यम से सूचना देती है। यह वाईफाई आधारित है और एक साथ कई इनपुट डिवाइस से कनेक्ट हो सकती है, जिससे बड़े अस्पतालों, दफ्तरों और औद्योगिक इकाइयों में भी इसका प्रभावी उपयोग संभव है।
जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वहां इसे आरएफ कम्युनिकेशन तकनीक के जरिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। घड़ी की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का सटीक स्थान और जरूरत—जैसे मशीन फॉल्ट, मेंटीनेंस, सेफ्टी अलर्ट, दवा या पानी—स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
एक बार चार्ज, पूरे दिन साथ
यह स्मार्ट घड़ी एक बार फुल चार्ज होने पर पूरे दिन काम करने में सक्षम है। पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि यह नवाचार तकनीक के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण है। इससे विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला ने इसे भारत में गैजेट मार्केट की दिशा बदलने वाला नवाचार बताया और कहा कि यह देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ऐसे बदलेगी ज़िंदगी और कामकाज
फैक्ट्रियों में शोरगुल के बीच भी सेफ्टी अलर्ट और मशीन फॉल्ट की जानकारी समय पर पहुंचाकर दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक।
अस्पतालों में मरीजों को तुरंत मदद, स्टाफ को सटीक सूचना और बेहतर देखभाल।
स्कूल और कॉलेज परिसरों में कक्षाओं की शांति बनाए रखते हुए लैब अटेंडेंट और सपोर्ट स्टाफ को बुलाने की सुविधा।
वृद्धाश्रम और केयर होम में बुजुर्ग सिर्फ एक बटन दबाकर इमरजेंसी या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सहायता पा सकेंगे।
मूक-बधिर और विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए नई राह, जहां स्क्रीन पर दिखने वाले संकेतों के आधार पर बिना मौखिक निर्देश के काम संभव होगा। पीएसआईटी के छात्रों की यह स्मार्ट घड़ी सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है।






