केजीएमयू धर्मांतरण कांड में जाकिर नाइक कनेक्शन की आशंका, किताबें और वीडियो बने जांच का आधार
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संवाद 24 संवाददाता। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से जुड़े धर्मांतरण और यौन शोषण कांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार देश के बड़े और संगठित धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस पूरे प्रकरण में विवादित इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रेरणा लेने के संकेत मिले हैं। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन से जाकिर नाइक के कथित भड़काऊ वीडियो और धर्मांतरण से जुड़ा साहित्य बरामद हुआ है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि केजीएमयू मामला, आगरा में पहले सामने आ चुके धर्मांतरण गैंग की कार्यप्रणाली से काफी मिलता-जुलता है। आगरा में पकड़े गए गैंग के पास से मौलाना कलीम सिद्दीकी की विवादित किताबें और जाकिर नाइक के वीडियो मिले थे। अब लखनऊ मामले में भी उसी तरह की सामग्री सामने आने से एजेंसियों को एक बड़े नेटवर्क की आशंका है।
आगरा गैंग से जुड़ते तार
आगरा धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान कुरैशी था, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। उसका असली नाम महेंद्र पाल जौदान उर्फ पप्पू था। उसने पहले ईसाई और बाद में मुस्लिम धर्म अपनाया था। वह मौलाना कलीम सिद्दीकी का करीबी माना जाता था और उनके जेल जाने के बाद गैंग की कमान उसी ने संभाली। आगरा पुलिस की विवेचना में यह सामने आया था कि गैंग का मकसद ‘गजवा-ए-हिंद’ की विचारधारा से प्रेरित था और इसके लिए सुनियोजित तरीके से युवतियों का ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण कराया जाता था।
विश्वास में लेने के बाद पीड़ितों को धीरे-धीरे गैंग का हिस्सा बनाया जाता और नई जिम्मेदारियां दी जाती थीं। इस नेटवर्क को विदेशों से फंडिंग मिलने के भी सबूत जांच में सामने आए थे। आगरा मामले की गंभीरता को देखते हुए आईबी और एनआईए की टीमें भी पूछताछ के लिए पहुंची थीं और पाकिस्तानी कनेक्शन तक के संकेत मिले थे।
केजीएमयू मामला भी उसी पैटर्न पर
एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि केजीएमयू धर्मांतरण कांड के मुख्य आरोपी डॉक्टर रमीज की पढ़ाई आगरा में हुई थी। आरोपियों के मोबाइल से बरामद वीडियो और डिजिटल सामग्री भी आगरा गैंग से मेल खाती है। इसी आधार पर जांच एजेंसियां यह मानकर चल रही हैं कि देश में बड़े स्तर पर सक्रिय धर्मांतरण गैंग काम कर रहे हैं, जिनका निशाना खासतौर पर पढ़ी-लिखी हिंदू युवतियां हैं।
इन गैंगों का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। पहले दोस्ती और भरोसे का जाल, फिर मानसिक दबाव और ब्रेनवॉश के जरिए धर्मांतरण। इसके बाद पीड़ितों को ही आगे नए लोगों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बहुत कम मामले सामने आते हैं, लेकिन जब कोई आवाज उठाता है तो नेटवर्क की परतें खुलने लगती हैं।
डॉक्टरों और मौलानाओं पर नजर
केजीएमयू प्रकरण में यह भी सामने आया है कि लखनऊ गैंग में पढ़े-लिखे लोग शामिल हैं, जिनमें कई डॉक्टर हो सकते हैं। इसी वजह से एसटीएफ ने वर्ष 2012 से अब तक एसएन मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की सूची मांगी है। सूची मिलने के बाद शॉर्टलिस्ट कर सर्विलांस और साइबर सेल की मदद से संदिग्धों का डेटा खंगाला जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ आगरा यूनिट ने चार मौलानाओं को भी रडार पर लिया है। आरोप है कि उनका एसएन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आना-जाना था। पिछले दस वर्षों की गतिविधियों, आर्थिक स्थिति और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है।
सबूत मिटाने की कोशिश
इस बीच जांच का शिकंजा कसता देख डॉक्टर रमीज के करीबी मेडिकल स्टाफ और सहयोगियों में हड़कंप मचा हुआ है। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए और व्हाट्सएप चैट हिस्ट्री डिलीट कर दी। केजीएमयू के कई विभागों में सन्नाटा पसरा है और डॉक्टर व कर्मचारी आपसी बातचीत से भी बचते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ चुके हैं, तो कुछ ने उसमें पोस्ट और कमेंट करना बंद कर दिया है।
हालांकि जांच एजेंसियों का दावा है कि रमीज के करीबियों का डिजिटल डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया है। कॉल डिटेल्स और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर मोबाइल जब्त कर डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कराया जाएगा।
गहरी जड़ों वाला नेटवर्क
केजीएमयू और आगरा मामलों की समानता ने जांच एजेंसियों को यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि धर्मांतरण गैंग की जड़ें काफी गहरी हैं और यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस संगठित गिरोह से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।






