Agra Fort का रहस्य: महमूद गजनवी के मकबरे का दरवाजा, जिसे अंग्रेजों ने सोमनाथ मंदिर का बताया
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा का ऐतिहासिक Agra Fort न सिर्फ मुग़लकालीन वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि इसमें छिपा एक ऐसा रहस्य भी है जिसने भारतीय इतिहास और संस्कृति के गौरव को लंबे समय तक भ्रमित किया। किले में रखा एक विशाल दरवाजा, जिसे छह दशक से अधिक समय तक लोग सोमनाथ मंदिर का दरवाजा मानते रहे, असल में महमूद गजनवी के मकबरे का है।
अफगानिस्तान से आया ‘विजय प्रतीक’
1842 में प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध में विजयी बंगाल नेटिव आर्मी ने अफगानिस्तान के गजनी स्थित महमूद गजनवी के मकबरे से यह दरवाजा उखाड़कर भारत लाया। उस समय गवर्नर जनरल लार्ड एलनबरो ने इसे जनता को यह कहकर दिखाया कि यह वही चंदन का दरवाजा है, जिसे 1025 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर से लूटा था। अंग्रेजों ने इसे “800 साल पुराने अपमान का बदला” कहकर प्रचारित किया।
सच का खुलासा
छह दशकों तक भारतीय जनमानस को यह भ्रम रहा। बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक सर जान मार्शल ने दरवाजे का असली इतिहास उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दरवाजा गजनी में महमूद गजनवी के मकबरे का है, न कि सोमनाथ मंदिर का।
Agra Fort में दरवाजा
आज यह दरवाजा दीवान-ए-खास के पास एक कक्ष में रखा हुआ है। शिला पट्ट के अनुसार, यह दरवाजा 16.5 फीट ऊंचा और 13.5 फीट चौड़ा है। इसमें कीलों का प्रयोग नहीं किया गया, बल्कि इसे ज्यामितीय तारारूपक, षटकोणीय और अष्टकोणीय फलकों से जोड़कर बनाया गया है।
दरवाजे की लकड़ी गजनी की स्थानीय देवदार से तैयार की गई थी और इसे प्राचीन गुजराती काष्ठकला से अलंकृत किया गया है। ऊपरी हिस्से पर अरबी भाषा में महमूद गजनवी की पदवियों का उल्लेख भी है।
सोमनाथ मंदिर का भ्रम
दरवाजे के पास एक छोटा शिला पट्ट भी है, जिस पर अंग्रेजों द्वारा प्रचारित “सोमनाथ दरवाजा” लिखा हुआ था। आजाद भारत में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार होने पर इसे वहां लगाने पर विचार हुआ था, लेकिन सच सामने आने के बाद यह योजना त्याग दी गई।
इतिहास और संस्कृति का प्रतीक
यह दरवाजा सिर्फ लकड़ी का बर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और भारतीय संस्कृति के गौरव का प्रतीक है। Agra Fort में यह दरवाजा आज भी आगरा आगंतुकों को उस समय की कहानियों और अंग्रेजों द्वारा फैलाए गए झूठे प्रचार की याद दिलाता है।






