इंसाफ की आस में 63 दिन, ठंड में धरने पर बैठी बूढ़ी मां, विधवा पत्नी और तीन मासूम, सिस्टम बना पत्थरदिल
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा की सदर तहसील परिसर में मृतक रवि सोलंकी का परिवार दो महीने से धरना दे रहा है। न कोई सुनवाई, न कोई राहत। दर्द यह कि जिनके भरोसे परिवार था, वही सिस्टम अब उनकी पीड़ा से मुंह मोड़े बैठा है।
करंट ने छीन लिया परिवार का सहारा
घटना 9 अप्रैल 2025 की है। किरावली तहसील के सामने ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के दौरान अचानक लाइन में करंट आ गया। बताया गया कि शटडाउन और रोस्टर टाइम के बावजूद लाइन चालू थी। विभागीय लापरवाही की कीमत मजदूर रवि सोलंकी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे रवि ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जंग लड़ी, लेकिन 15 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया था।
लिखित आश्वासन, अधूरी मदद
ग्रामीणों के दबाव के बाद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अधिशासी और सहायक अभियंता ने लिखित रूप से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और 5 लाख रुपये बीमा राशि देने का आश्वासन दिया था। लेकिन हकीकत यह रही कि परिवार को अब तक सिर्फ 7.50 लाख रुपये ही मिले, बाकी राशि आज भी अधर में लटकी है।
ठंड में कट रहीं रातें
न्याय और पूरी आर्थिक सहायता की मांग को लेकर 12 नवंबर से रवि की मां, उसकी विधवा पत्नी और तीन मासूम बच्चे सदर तहसील परिसर में धरने पर बैठे हैं। समाजसेवी चौ. दिलीप सिंह ने बताया कि बीते 63 दिनों से यह परिवार रातें तहसील परिसर में ही गुजार रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्स कंपनी ने 30 हजार रुपये की मांग की थी, जिसे न देने के कारण शेष सहायता राशि रोक दी गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार यह रकम देने में असमर्थ है।
डीएम के निर्देश भी बेअसर
हैरानी की बात यह है कि जिलाधिकारी अरविंद बंगारी पांच बार दक्षिणांचल के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं, इसके बावजूद मामला जस का तस बना हुआ है। प्रशासनिक आदेशों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और कंपनी बेपरवाह बने हुए हैं।
इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद बंगारी ने कहा है कि लापरवाह अधिकारियों और आउटसोर्स कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।






