14 नवंबर 2025 का वैदिक पंचांग
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संवाद 24 (आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री)
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 14 नवम्बर 2025, शुक्रवार
कालगणना
विक्रम संवत् – 2082
शक संवत् – 1947
कलियुग – 5127
संवत्सर – सिद्धार्थी
अयन – दक्षिणायण
ऋतु – हेमंत
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – मार्गशीर्ष
पक्ष – कृष्ण
तिथि – दशमी रात्रि 09:23 तक, तत्पश्चात् एकादशी
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी रात्रि 05:21 (15 नवम्बर) तक, तत्पश्चात् उत्तराफाल्गुनी
योग – इन्द्र प्रातः 06:28 तक, तत्पश्चात् वैधृति
करण – तैतिल रात्रि 09:23 तक, तत्पश्चात् गर
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:40
सूर्यास्त – 05:43
ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:57 से 05:49 तक
अभिजीत मुहूर्त – 11:49 से 12:33 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:45 से 12:38 (15 नवम्बर) तक
भद्रा – 12:08pm से 12:50am तक
मूल – नहीं
पंचक – नहीं
दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
राहुकाल – प्रातः 10:47 से 12:10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
व्रत पर्व विवरण
गुरु दशमी – इस दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की उपासना अत्यंत फलदायक मानी गई है।
विशेष जानकारी
दशमी तिथि पर तुलसी पत्र का तोड़ना वर्जित है। ऐसा करने से पुण्य की हानि होती है।
दिशा विवेक
1. पूजा आरती पश्चिम दिशा में हो तो खुशियाँ दब जाती हैं।
2. पूजा आरती दक्षिण दिशा में हो तो रोग और कष्ट बढ़ते हैं।
3. पूर्व दिशा की ओर पूजा करने से लौकिक उन्नति होती है।
4. उत्तर दिशा की ओर पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।
यदि गुरूमंत्र प्राप्त हो तो दोनों प्रकार की उन्नति होती है। इसलिए आरती की दिशा सदैव पूर्व या उत्तर में रखें।
सोते समय
1. पश्चिम में सिर रखने से चिंता बनी रहती है,
2. उत्तर में सिर रखने से रोग बढ़ते हैं।
3. सिरहाना पूरब या दक्षिण दिशा की ओर रखें।
विद्यार्थियों के लिए उपाय
पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने हेतु प्रातःकाल स्नान के पश्चात् गणेश जी को दूर्वा, मोदक और जल अर्पित करें तथा “ ॐ गं गणपतये नमः ” मंत्र का 11 बार जप करें। यह उपाय स्मरणशक्ति और एकाग्रता में वृद्धि करता है।

