राष्ट्रकथा में ‘दबदबे’ के उल्लेख पर भावुक हुए बृजभूषण, मंच से छलके आंसू
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संवाद 24 गोंडा। गोंडा में आयोजित राष्ट्रकथा के दूसरे दिन का मंच भावनाओं से भर उठा, जब पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने जीवन के संघर्षों को याद कर फूट-फूटकर रो पड़े। करीब एक घंटे तक वे भावुक अवस्था में रहे। कार्यक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंच पर उनका दर्द और भावनात्मक जुड़ाव साफ नजर आता है।
दरअसल, राष्ट्रकथा के दौरान सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए अवध क्षेत्र और गोंडा का उल्लेख किया। मंच से उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं— बृजभूषण का दबदबा था, है और रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने स्वयं को बृजभूषण शरण सिंह का “पिता” बताते हुए कहा कि यहां इनका बाप बैठा है, मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा। इस वक्तव्य के दौरान बृजभूषण शरण सिंह भावुक हो उठे और मंच पर ही आंसू बहाने लगे।

सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने कहा कि राष्ट्रकथा का उद्देश्य किसी को तोड़ना नहीं, बल्कि खंडित हो रहे राष्ट्र को जोड़ना है। इस कथा के माध्यम से उन सभी पहलुओं को सामने लाया जाएगा, जो राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं और उसकी एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कथा न सिर्फ गोंडा, बल्कि देश-विदेश तक सुनी जा रही है।
उन्होंने सनातन संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि भारत में रहने वाले 140 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सनातन संस्कृति से जुड़े हैं। परिस्थितियां भले बदली हों, लेकिन संस्कृति सनातन ही थी, है और रहेगी। हम यहां सनातन और राष्ट्र को एक करने आए हैं।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कहा कि राष्ट्रकथा करने का अधिकार उसी को है, जिसने अपना जीवन भगवान राम और राष्ट्र को समर्पित कर दिया हो। जिसने अपनी जवानी, वाणी और पूरी जिंदगी राष्ट्र के लिए न्योछावर कर दी हो, वही भारत की एकता और अखंडता को मजबूत कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराजा दिलीप की इस भूमि पर भविष्य में भारत का एक बड़ा पर्यटन केंद्र विकसित होगा, जहां नंदिनी गोमाता और महाराजा दिलीप के दर्शन के लिए देश-विदेश से लोग आएंगे।

मंच से यह भी कहा गया कि जैसे कोई अपने प्रिय से कहता है कि उसने दिल निकालकर रख दिया है, उसी तरह बृजभूषण शरण सिंह ने इस क्षेत्र, राष्ट्र निर्माण और सनातन को एक करने के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया है। वे नंदिनी माता और महाराजा दिलीप के उपासक हैं। सद्गुरु ने उनके पुत्र करण भूषण सिंह, प्रतीक भूषण सिंह और पूरे परिवार से इस कीर्ति को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के जीवन संघर्षों का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि कम उम्र में उन्होंने अपने पांच भाइयों को खो दिया, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। छात्रसंघ राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर लोकसभा तक पहुंचा। उन्होंने कई बार सांसद रहते हुए क्षेत्र में शिक्षा संस्थानों की मजबूत नींव रखी। आज देवीपाटन मंडल में उनके दर्जनों डिग्री और इंटर कॉलेज संचालित हो रहे हैं।
राष्ट्रकथा के मंच पर भावनाओं, विचारों और राष्ट्रबोध का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे माहौल को राष्ट्र और सनातन चेतना से भर दिया।






