राहुल गांधी के विदेश दौरों पर निगरानी का आरोप, सैम पित्रोदा ने सरकार पर उठाए सवाल
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राहुल गांधी के विदेश दौरों पर निगरानी का आरोप, सैम पित्रोदा ने सरकार पर उठाए सवालओवरसीज कांग्रेस प्रमुख बोले— दूतावास के अधिकारी रखते हैं नजर, विदेशी नेताओं से मिलने से भी रोका जाता है
संवाद 24 नई दिल्ली। ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि राहुल गांधी के विदेश दौरों के दौरान भारतीय दूतावास के अधिकारी उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं और कई मौकों पर उन्हें विदेशी नेताओं से मिलने से मना किया जाता है। पित्रोदा ने यह बातें इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं।
सैम पित्रोदा ने कहा कि उन्होंने स्वयं देखा है कि राहुल गांधी के होटल, बैठकों और एयरपोर्ट पर उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास इसके ठोस सबूत नहीं हैं, लेकिन अनुभव के आधार पर वह यह बात कह रहे हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और विपक्ष के नेता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है।
भाजपा द्वारा राहुल गांधी पर विदेश जाकर देश की छवि खराब करने के आरोपों को खारिज करते हुए पित्रोदा ने कहा कि सच को सच ही कहा जाना चाहिए, चाहे वह भारत में कहा जाए या विदेश में। उन्होंने दोहरे मानदंडों का आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चाई को स्थान के आधार पर नहीं बदला जा सकता।
राहुल गांधी के जर्मनी दौरे की टाइमिंग पर उठे सवालों पर पित्रोदा ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राएं अचानक तय नहीं होतीं, बल्कि महीनों पहले से उनकी योजना बनती है। उन्होंने जॉर्ज सोरोस और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि कांग्रेस या राहुल गांधी का किसी भी कथित एंटी-इंडिया नेटवर्क से कोई संबंध नहीं है।
पित्रोदा ने अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा, चर्चों पर हमलों और सामाजिक तनाव के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा समाज के लिए घातक है और इससे भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने इसे नफरत की राजनीति का नतीजा बताया।
मनरेगा की जगह नए कानून में धार्मिक नाम जोड़े जाने पर पित्रोदा ने सवाल उठाते हुए कहा कि महात्मा गांधी के नाम से चल रही योजना में क्या समस्या थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश के होते हैं, न कि किसी एक समुदाय के, और धर्म निजी आस्था का विषय है, शासन का नहीं।
लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली पर बोलते हुए पित्रोदा ने कहा कि भारत सहित कई देशों में संस्थाएं दबाव में हैं। उन्होंने ईवीएम, मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर भरोसे में आई कमी की बात कही और कहा कि यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि हंगरी, तुर्की और अमेरिका जैसे देशों में भी देखी जा रही है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को लेकर पित्रोदा ने कहा कि भारत को सबसे पहले अपने पड़ोस पर ध्यान देना चाहिए। यदि भारत विश्व गुरु बनना चाहता है, तो उसे बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में शांति और स्थिरता के लिए नेतृत्व दिखाना होगा।
गौरतलब है कि राहुल गांधी के बयानों को लेकर भाजपा ने हाल के दिनों में तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी विदेश जाकर भारत को बदनाम करते हैं और देश में अस्थिरता का माहौल बनाना चाहते हैं। इसी राजनीतिक टकराव के बीच सैम पित्रोदा का यह बयान सामने आया है, जिसने एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है।






