‘पहले भारत लौटिए’: भगोड़ा टैग को चुनौती देने पर बॉम्बे हाई कोर्ट का विजय माल्या से सख्त सवाल
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संवाद 24 डेस्क। बॉम्बे हाई कोर्ट ने फरार कारोबारी विजय माल्या को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि जब तक वह भारत लौटकर अदालत के अधिकार क्षेत्र में खुद को प्रस्तुत नहीं करते, तब तक उनकी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने यह टिप्पणी माल्या द्वारा ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने और उससे जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
दो याचिकाओं पर उठे सवाल
विजय माल्या ने हाई कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। पहली याचिका में उन्होंने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी है, जबकि दूसरी याचिका में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया गया है। माल्या वर्ष 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं।
कोर्ट की पीठ की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड़े की पीठ ने माल्या के वकील अमित देसाई से कहा कि जब तक याचिकाकर्ता भारत आकर अदालत के समक्ष पेश नहीं होता, तब तक किसी कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार संभव नहीं है।
ED का कड़ा विरोध
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि कोई भी फरार आरोपी विदेश में बैठकर कानून की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने कोर्ट को बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून इसी उद्देश्य से लाया गया था ताकि आरोपी विदेश में रहते हुए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग न कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
एक साथ नहीं होगी सुनवाई
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि माल्या की दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई नहीं की जा सकती। पीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता किस याचिका को आगे बढ़ाना चाहते हैं और किसे वापस लेना चाहते हैं। इस पर माल्या के वकील ने दलील दी कि बैंकों का करीब 14 हजार करोड़ रुपये का बकाया संपत्तियों की जब्ती और लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की वसूली से कवर हो चुका है।
हालांकि, कोर्ट ने सवाल किया कि बिना अदालत के समक्ष पेश हुए आपराधिक जिम्मेदारी से कैसे मुक्ति मिल सकती है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी तय की है। तब तक विजय माल्या को यह स्पष्ट करना होगा कि वह किस याचिका पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
गौरतलब है कि जनवरी 2019 में प्रवर्तन निदेशालय के मामले में एक विशेष अदालत ने माल्या को पीएमएलए के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। माल्या पर बैंक ऋण डिफॉल्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।






