कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर हलचल तेज: चुनावी हार के बाद प्रियंका गांधी को बड़ी भूमिका देने की मांग, राहुल पर उठे सवाल
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संवाद 24 डेस्क। महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में लगातार चुनावी हार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष की आवाजें तेज होती दिख रही हैं। पार्टी के कुछ नेताओं ने खुलकर प्रियंका गांधी वाड्रा को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक निर्णायक भूमिका दिए जाने की मांग की है, जिससे राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर भीतरखाने चल रही चर्चाएं सतह पर आ गई हैं।
प्रियंका को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने की मांग
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में सार्वजनिक बयान में कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के मुद्दे पर प्रियंका गांधी वाड्रा सबसे मुखर रहीं। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद मसूद ने स्पष्ट किया कि उनके नेता राहुल गांधी ही हैं।
इससे पहले ओडिशा के पूर्व कांग्रेस विधायक मोहम्मद मुकीम ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर राहुल गांधी के स्थान पर प्रियंका गांधी समेत युवा नेतृत्व को आगे लाने की मांग की थी। पार्टी ने इस कदम को अनुशासनहीनता मानते हुए मुकीम को निष्कासित कर दिया।
बीजेपी का हमला: टीम राहुल बनाम टीम प्रियंका
इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चाओं को मुद्दा बनाते हुए नेतृत्व संकट का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस में “टीम राहुल बनाम टीम प्रियंका” की स्थिति बन रही है और पार्टी के भीतर राहुल गांधी को लेकर भरोसा कमजोर हो रहा है।
संसद में प्रियंका की बढ़ती मौजूदगी
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। वंदे मातरम पर चर्चा और मनरेगा से जुड़े विधेयक के विरोध के दौरान उनके भाषण सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। संसद में उनकी प्रस्तुतियों की तुलना राहुल गांधी के भाषणों से की जा रही है।
प्रियंका गांधी ने प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से सीधे संवाद किया और बाद में उनसे मुलाकात भी की। इसके अलावा, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय समारोह में भी हिस्सा लिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे।
कांग्रेस का आधिकारिक रुख
हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा राहुल गांधी के नेतृत्व में ही काम कर रहा है। पार्टी का कहना है कि भीतर से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं चल रही है और हालिया बयान व्यक्तिगत राय हैं।
फिलहाल, चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर उठी ये आवाजें थमी नहीं हैं। प्रियंका गांधी की बढ़ती सक्रियता और कुछ नेताओं के बयान आने वाले समय में पार्टी की आंतरिक राजनीति को और चर्चा में ला सकते हैं।






