ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा प्रहार, बोलीं— बंगाल के बाद दिल्ली भी भाजपा से छीनेंगे
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अल्पसंख्यकों से एकजुट रहने की अपील, गृह मंत्री पर तानाशाही रवैये का लगाया आरोप
संवाद 24 कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए भाजपा को खुली चुनौती दी है। कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के बूथ लेवल सहायकों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि जिस तरह बंगाल में भाजपा को रोका गया है, उसी तरह आगे चलकर दिल्ली की सत्ता भी उससे छीनी जाएगी।
ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन पर तानाशाही शैली में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मौजूदा कार्यप्रणाली देश को एक खतरनाक दिशा में ले जा रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री हर चीज को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं और यहां तक कि प्रधानमंत्री के कामकाज में भी दखल दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने विवेक का इस्तेमाल करें और समझें कि देश में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
अल्पसंख्यकों से सीधी अपील करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा धनबल के जरिए समाज को बांटने और विशेष रूप से मुसलमानों के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों का मुकाबला तभी संभव है, जब अल्पसंख्यक एकजुट रहेंगे। साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बंगाल में भाजपा को किसी भी तरह पैर जमाने न दें और सत्ता पर कब्जे की उसकी कोशिशों का पूरी मजबूती से विरोध करें।
मनरेगा से जुड़े मुद्दे पर भी ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी की विरासत को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है और नए कानून के जरिए मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाया गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रतीकों का चयनात्मक इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें राम नाम से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रतीकों की राजनीति पर सवाल जरूर हैं।
इसके अलावा ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार को जानकारी दिए बिना केंद्रीय कर्मचारियों को पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, जो संघीय ढांचे की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अधिकतर बूथ लेवल अधिकारी स्कूल शिक्षक हैं और इस समय माध्यमिक परीक्षाएं नजदीक हैं, ऐसे में यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
ममता बनर्जी के इस बयान के बाद एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच सियासी टकराव तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।






