अरावली संरक्षण को लेकर प्रदेशभर में उग्र प्रदर्शन, कई जिलों में पुलिस से झड़प, सीकर में हर्ष पर्वत पर चढ़े प्रदर्शनकारी, उदयपुर में गिरफ्तारियां
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संवाद 24 डेस्क। अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण को लेकर राजस्थान में बुधवार को व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कई जिलों में एक साथ प्रदर्शन किया, जहां कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी।
उदयपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अरावली को बचाने की मांग की।
सीकर जिले में पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 945 मीटर ऊंचे हर्ष पर्वत पर पहुंचकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। उन्होंने अरावली को राजस्थान का “प्राकृतिक कवच” बताते हुए इसके संरक्षण की अपील की।
अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली राजस्थान के लिए फेफड़ों के समान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अरावली से जुड़ा फैसला वापस नहीं लिया गया, तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी।

क्या है विरोध की वजह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हालिया न्यायिक व्याख्या के अनुसार केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली भू-आकृतियों को ही अरावली माना जाएगा। इससे बड़ी संख्या में पहाड़ी क्षेत्र संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकते हैं, जो पर्यावरण और जैव-विविधता के लिए गंभीर खतरा है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- अरावली से संबंधित मानकों की पुनः समीक्षा
- पहाड़ी क्षेत्रों को संरक्षण के दायरे में बनाए रखना
- खनन और अंधाधुंध विकास पर रोक
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि अरावली सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जीवनरेखा है। आंदोलनकारियों ने संकेत दिए हैं कि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे भी राज्यव्यापी प्रदर्शन जारी रहेगा।






