लिव-इन रिलेशनशिप पर मोहन भागवत का बयान: जिम्मेदारी से बचना सही नहीं, परिवार समाज की मूल इकाई

Share your love

संवाद 24 डेस्क। कोलकाता में RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लिव-इन रिलेशनशिप और पारिवारिक मूल्यों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लिव-इन संबंधों में लोग अक्सर जिम्मेदारी लेने से बचते हैं, जो समाज के लिए उचित नहीं है।

भागवत ने कहा कि विवाह और परिवार केवल शारीरिक संतुष्टि का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह समाज की आधारभूत इकाई हैं। परिवार ही वह स्थान है, जहां व्यक्ति सामाजिक जीवन के मूल्य, संस्कार और जिम्मेदारियां सीखता है।

उन्होंने विवाह की उम्र को लेकर कहा कि इसकी कोई तय सीमा नहीं हो सकती, लेकिन विभिन्न अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार 19 से 25 वर्ष की उम्र विवाह के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस आयु वर्ग में विवाह और संतुलित पारिवारिक जीवन से माता-पिता और बच्चों दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

कार्यक्रम में परिवार और जनसंख्या के मुद्दे पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि बच्चों की संख्या का निर्णय परिवार और समाज की परिस्थितियों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या को केवल बोझ नहीं, बल्कि एक संपत्ति के रूप में भी देखा जाना चाहिए, बशर्ते उसे सही नीतियों के माध्यम से प्रबंधित किया जाए।

उन्होंने देश की जनसंख्या नीति, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे, महिलाओं की स्थिति और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS को लेकर लोगों में बनी कई गलत धारणाएं अब धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ राष्ट्रवादी है, हिंदुओं की सुरक्षा की बात करता है, लेकिन किसी भी समुदाय के विरोध में नहीं है।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) डीके जोशी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News