भारत स्वभाव से हिंदू राष्ट्र है, इसके लिए संवैधानिक मंजूरी जरूरी नहीं: मोहन भागवत
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RSS प्रमुख बोले— यह सत्य है, जैसे सूरज पूरब से उगता है; संसद शब्द जोड़े या न जोड़े, हकीकत नहीं बदलती
संवाद 24 डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत स्वाभाविक रूप से एक हिंदू राष्ट्र है और इसे साबित करने के लिए किसी संवैधानिक संशोधन या औपचारिक स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक निर्विवाद सत्य है, जिसे कानून की मुहर की जरूरत नहीं होती।
कोलकाता में RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘100 व्याख्यान माला’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जैसे यह बताने के लिए संवैधानिक अनुमति नहीं चाहिए कि सूर्य पूरब से उगता है, उसी तरह भारत के हिंदू राष्ट्र होने के लिए भी किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक भारतीय संस्कृति का सम्मान होता रहेगा, भारत हिंदू राष्ट्र बना रहेगा।
संघ प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद चाहे भविष्य में संविधान में ‘हिंदू राष्ट्र’ शब्द जोड़े या न जोड़े, इससे जमीनी सच्चाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, यह वास्तविकता पहले से मौजूद है और किसी शब्द के जुड़ने या न जुड़ने से बदलने वाली नहीं है।
अपने विचारों को आगे बढ़ाते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जो भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और भारतीय संस्कृति की कद्र करता है, वह इसी विचारधारा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब तक इस देश में एक भी ऐसा व्यक्ति जीवित है, जो अपने भारतीय पूर्वजों की परंपराओं और मूल्यों को मानता है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र रहेगा। यही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मूल सोच और विचारधारा है।
भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि जन्म के आधार पर बनी जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ व्यापक सांस्कृतिक चेतना से है, न कि किसी संकीर्ण सामाजिक ढांचे से।
RSS को लेकर फैली भ्रांतियों पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि संगठन मुस्लिम विरोधी नहीं है। उन्होंने बताया कि RSS हमेशा यह कहता आया है कि भारत हिंदू राष्ट्र है, क्योंकि यहां की सांस्कृतिक परंपराएं और बहुसंख्यक समाज हिंदू दर्शन से जुड़ा हुआ है, न कि किसी के विरोध के आधार पर।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द मूल रूप से संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा नहीं था और इसे 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़ा गया था। भागवत ने लोगों से RSS की शाखाओं और कार्यालयों को नजदीक से देखने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे संगठन को लेकर फैली ‘मुस्लिम विरोधी’ छवि अपने आप टूट जाएगी।
संघ प्रमुख ने कहा कि अब बड़ी संख्या में लोग यह समझ चुके हैं कि RSS हिंदुओं की सुरक्षा और राष्ट्रवाद की बात करता है, लेकिन किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है। उनका कहना था कि संगठन का लक्ष्य एकजुट, सांस्कृतिक रूप से मजबूत और राष्ट्र के प्रति समर्पित समाज का निर्माण करना है।






