रेखा गुप्ता पर हमले में कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बोला— मुख्यमंत्री को आसान निशाना समझा गया
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तीस हजारी अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया हत्या के प्रयास और साजिश का मामला माना, दोनों आरोपियों पर आरोप तय
संवाद 24 नई दिल्ली। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में अहम रुख अपनाते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपियों को मुख्यमंत्री “आसान शिकार” लगीं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मामला प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश और हत्या के प्रयास की श्रेणी में आता है।
अपर सत्र न्यायाधीश (एएसजे) एकता गौबा मान ने आरोपी साकरिया राजेशभाई खिमजी और सैयद तहसीन रजा रफीउल्लाह शेख के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं में आरोप तय करने के आदेश दिए। इनमें आपराधिक साजिश, सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारी पर हमला और हत्या के प्रयास जैसी धाराएं शामिल हैं।
कोर्ट ने चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट होता है कि घटना से एक दिन पहले आरोपी ने शालीमार बाग स्थित मुख्यमंत्री के निजी आवास की रेकी की थी। इसके साथ ही दोनों आरोपियों के बीच हुई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी जांच का हिस्सा है। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी राजेश ने मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस के वीडियो क्लिप सह-आरोपी तहसीन रजा को भेजे थे, जो साजिश की ओर संकेत करते हैं।
अदालत के अनुसार, ये सभी तथ्य इस ओर इशारा करते हैं कि मुख्यमंत्री को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पूर्व नियोजित योजना बनाई गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि घटना के समय आरोपी ने धीरेंद्र नामक व्यक्ति पर हमला किया, जो मुख्यमंत्री की सुरक्षा में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा था।
दोनों आरोपियों पर BNS की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 221 (सरकारी कर्मचारी को रोकना), 132 (सरकारी कार्य में बाधा डालने के लिए हमला) और 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत आरोप तय किए गए हैं। इसके अलावा, आरोपी साकरिया राजेशभाई पर धारा 115(2) के तहत चोट पहुंचाने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी दिल्ली का निवासी नहीं था और सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश से जुड़ी शिकायत के नाम पर मुख्यमंत्री तक पहुंचने का उसके पास कोई वैध कारण नहीं था। अदालत ने कहा कि पीड़िता एक महिला हैं और कानून के तहत हर महिला को समान सुरक्षा प्राप्त है, चाहे वह आम नागरिक हो या संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री।
अदालत के अनुसार, आरोपी सुरक्षा घेरा तोड़ने में सफल रहा और उसने मुख्यमंत्री के साथ हाथापाई की। इस दौरान उनके सिर के टेम्पोरल हिस्से में चोट आई, नाक से खून बहा और होंठ पर भी चोट दर्ज की गई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने दोनों हाथों से उनका गला दबाया और जान से मारने की धमकी दी।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 20 अगस्त 2025 की है, जब सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था। चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी साकरिया राजेशभाई सुरक्षा व्यवस्था तोड़ते हुए मुख्यमंत्री तक पहुंचा, उन्हें जमीन पर गिराया और गला घोंटने की कोशिश की, जिससे उन्हें चोटें आईं।
गुजरात से जुड़ी साजिश का दावा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस हमले की साजिश गुजरात के राजकोट में रची गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, सह-आरोपी तहसीन रजा ने आरोपी राजेश के बैंक खाते में 2,000 रुपये ट्रांसफर किए थे, जिसे साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस मामले में सिविल लाइंस थाने में 20 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। दिल्ली सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रदीप राणा और अधिवक्ता कार्तिक गादी ने अदालत में पक्ष रखा। अब इस मामले में आरोपों की औपचारिक स्वीकारोक्ति या अस्वीकृति के लिए अगली सुनवाई 26 दिसंबर 2025 को निर्धारित की गई है।






