रेगिस्तान में गूंजे युद्ध अभ्यास के शंखनाद: हेलीकॉप्टर से उतरे कमांडो, भारत–मलेशिया ने दिखाई संयुक्त सैन्य ताकत
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संवाद 24 डेस्क। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में भारत और मलेशिया की सेनाओं ने अपनी साझा युद्ध क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘हरिमाऊ शक्ति–2025’ के तहत दोनों देशों के सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में उन्नत सामरिक अभियानों को अंजाम दिया। इस अभ्यास में हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतरने (हेलीबोर्न इन्सर्शन), घात लगाकर कार्रवाई और सटीक लाइव फायरिंग जैसे उच्चस्तरीय युद्ध कौशल का अभ्यास किया गया।
यह अभ्यास भारतीय सेना और रॉयल मलेशियाई सेना के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का मजबूत संकेत माना जा रहा है। ‘हरिमाऊ शक्ति’ का यह पांचवां संस्करण 5 से 18 दिसंबर 2025 तक चला।
120 भारतीय और 70 मलेशियाई सैनिकों ने लिया हिस्सा
अभ्यास में भारतीय सेना के 120 जवान शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से डोगरा रेजिमेंट के सैनिक थे। वहीं मलेशिया की 25वीं बटालियन के 70 जवानों ने भी अभ्यास में भाग लिया। दोनों सेनाओं ने मिलकर आतंकवाद-रोधी और उग्रवाद-निरोधी अभियानों से जुड़े आधुनिक सिद्धांतों का आदान-प्रदान किया।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ समापन
दो सप्ताह तक चले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का समापन राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया। समापन चरण में संयुक्त अभियानों, समन्वित पैट्रोलिंग और त्वरित निर्णय क्षमता पर विशेष जोर दिया गया।
हेलीबोर्न इन्सर्शन और लाइव फायरिंग का दमदार प्रदर्शन
अभ्यास के दौरान सैनिकों ने कठिन और सीमित भू-भाग में हेलीकॉप्टर से स्लिदरिंग करते हुए जमीन पर उतरकर लक्ष्य को नियंत्रित करने का अभ्यास किया। इसके साथ ही घात लगाने की रणनीति, छोटे दस्तों की आक्रामक क्षमता, संयुक्त पेट्रोलिंग रिहर्सल और लाइव फायरिंग जैसे उन्नत मॉड्यूल्स भी सफलतापूर्वक पूरे किए गए।
रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘हरिमाऊ शक्ति–2025’ न केवल दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी और ऑपरेशनल तालमेल को मजबूत करता है, बल्कि भारत–मलेशिया के बीच आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई देता है। यह अभ्यास भविष्य में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियानों और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






