“ये अयोध्या नहीं, मुर्शिदाबाद है” बाबरी मस्जिद निर्माण पर अड़े TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर, बोले– कोई ताकत रोक नहीं सकती
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बाबरी मस्जिद निर्माण पर अड़े TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर, बोले– कोई ताकत रोक नहीं सकती
संवाद 24 मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने साफ शब्दों में कहा है कि यह अयोध्या नहीं, बल्कि मुर्शिदाबाद है और यहां बनने वाली बाबरी मस्जिद को कोई भी राजनीतिक या कानूनी ताकत रोक नहीं सकती।
हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि मस्जिद का निर्माण तीन साल के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और इसका काम फरवरी से औपचारिक रूप से शुरू होगा। उनके मुताबिक, इस परियोजना की नींव पहले ही रखी जा चुकी है, जिसमें सऊदी अरब से मौलवियों की मौजूदगी भी रही।
“1992 से मन में था फैसला, 2019 में लिया अंतिम संकल्प”
एक मीडिया इंटरव्यू में हुमायूं कबीर ने कहा कि
- बाबरी मस्जिद विध्वंस (1992) के बाद से ही यह विचार उनके मन में था
- लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने तय कर लिया कि अब बाबरी मस्जिद बंगाल में बनेगी
कबीर ने यह भी कहा कि उनका बाबर से कोई व्यक्तिगत या वैचारिक जुड़ाव नहीं है, लेकिन “बाबरी मस्जिद” नाम इसलिए चुना गया है क्योंकि यह नाम आज भी एक वर्ग के लिए भावनात्मक पीड़ा से जुड़ा है।
“जय श्रीराम कहा जा सकता है, तो अल्लाह हू अकबर भी”
हुमायूं कबीर ने धार्मिक नारों को लेकर भी खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा—
अगर चुनावी मंचों पर ‘जय श्रीराम’ बोला जाना सामान्य है, तो ‘अल्लाह हू अकबर’ कहना भी उतना ही जायज है। उनके अनुसार, अभिव्यक्ति की आज़ादी सभी के लिए बराबर होनी चाहिए।
25 बीघा ज़मीन, 2 करोड़ का चंदा, ईंटें पहुंचीं
कबीर का दावा है कि—
- मस्जिद निर्माण के लिए 25 बीघा ज़मीन खरीदी जा चुकी है
- अब तक करीब 2 करोड़ रुपये का चंदा इकट्ठा हो चुका है
- बड़ी संख्या में ईंटें पहले ही साइट पर पहुंचाई जा चुकी हैं
- हर शुक्रवार वहां नमाज़ अदा की जाएगी
उन्होंने यह भी कहा कि चंदे की रकम सुरक्षित है और ज़मीन से जुड़े कानूनी दस्तावेजों की प्रक्रिया चल रही है।
निर्माण स्थल पर उमड़ी भीड़, खुले खेतों में अदा हुई नमाज़
पिछले सप्ताह मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित मस्जिद स्थल पर सैकड़ों लोगों ने सामूहिक नमाज़ अदा की।
सुबह से ही आसपास के गांवों से लोग खेतों के रास्ते वहां पहुंचने लगे। आयोजकों ने लाउडस्पीकर के जरिए भीड़ को दिशा-निर्देश दिए। नमाज़ के दौरान पूरा इलाका पुलिस और स्थानीय प्रशासन की नजर में रहा।
सियासी तनाव बढ़ने के संकेत
हुमायूं कबीर के बयान और निर्माण गतिविधियों के बाद—
- बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है
- भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है
- प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं
संवाद 24 इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।






