प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: स्कूलों पर आदेश उल्लंघन का आरोप, 17 दिसंबर को अहम सुनवाई
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संवाद 24। दिल्ली-एनसीआर में गंभीर होते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कई स्कूल अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नवंबर-दिसंबर में खुले मैदानों में खेल गतिविधियां जारी रखे हुए हैं। यह जानकारी कोर्ट के अमिकस क्यूरी (सलाहकार) की ओर से दी गई, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के मौजूदा हालात में बच्चों की सेहत को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता से जुड़े मामलों पर 17 दिसंबर को विस्तृत सुनवाई करेगा।
आदेशों को दरकिनार करने के आरोप
अमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद कुछ स्कूल प्रतिबंधित गतिविधियों के लिए “तरीके” निकाल रहे हैं। खुले में खेल आयोजनों पर रोक के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि केवल आदेश पारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि वे व्यावहारिक हैं या नहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि अगर निर्देशों का पालन संभव नहीं होगा, तो लोग उनकी गंभीरता को नहीं समझेंगे। नागरिकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी जीवनशैली में भी बदलाव करना होगा।
गरीब और श्रमिक वर्ग पर असर
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण उपायों का गरीब तबके पर पड़ने वाला प्रभाव नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमिकस क्यूरी ने बताया कि GRAP-IV लागू होने के बाद कई निर्माण श्रमिकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
मीडिया में आने के लिए याचिकाएं न लगें
कोर्ट ने अन्य वकीलों को निर्देश दिया कि वे अपने सुझाव और आपत्तियां सीधे अमिकस क्यूरी के समक्ष रखें और केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए आवेदन दाखिल न करें। अदालत ने कहा कि उसका समय सीमित है और मुद्दों पर सार्थक बहस जरूरी है।
हाइब्रिड मोड में पेशी की सलाह
मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और पक्षकारों को हाइब्रिड मोड यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की सलाह भी दी है। इस संबंध में अदालत ने सर्कुलर जारी किया है।
अब सबकी नजरें 17 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण संकट और आदेशों के क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट अहम दिशा-निर्देश दे सकता है।






