राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संत और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन, आज अयोध्या में जल समाधि
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संवाद 24, अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत, रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। मध्य प्रदेश के रीवा में रामकथा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने दोपहर 12:20 बजे अंतिम सांस ली।

उनका पार्थिव शरीर देर रात अयोध्या लाया गया, जहां हिंदू धाम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
उनके उत्तराधिकारी महंत राघवेश दास वेदांती ने बताया कि मंगलवार सुबह अंतिम यात्रा हिंदू धाम से निकलेगी और राम मंदिर तक जाएगी। इसके बाद सुबह 10 बजे सरयू तट पर जल समाधि दी जाएगी। अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

रीवा में रामकथा के दौरान बिगड़ी तबीयत
डॉ. वेदांती बीते कुछ दिनों से रीवा में रामकथा कर रहे थे। कथा के दौरान उनकी तबीयत अचानक खराब हुई, जिसके बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें भोपाल एम्स एयरलिफ्ट करने की तैयारी थी और एयर एम्बुलेंस भी पहुंच गई थी, लेकिन घने कोहरे के कारण लैंडिंग नहीं हो सकी। इसके कुछ समय बाद उनका निधन हो गया।
अयोध्या से रहा गहरा जुड़ाव
डॉ. रामविलास दास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। महज 12 वर्ष की उम्र में वे अयोध्या आ गए थे और इसके बाद उनका पूरा जीवन अयोध्या से ही जुड़ा रहा। वे हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास के शिष्य थे और अयोध्या के हिंदू धाम, नया घाट में निवास करते थे। उनका आश्रम वशिष्ठ भवन के नाम से भी जाना जाता है।
राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका
डॉ. वेदांती राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे। वे रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य रहे और वर्षों तक रामलला व हनुमानगढ़ी के सामने रामकथा करते रहे। उन्हें संस्कृत का विशिष्ट विद्वान माना जाता था।
वे बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी बनाए गए थे, लेकिन 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि विध्वंस के पीछे कोई साजिश साबित नहीं होती। हालांकि, मीडिया इंटरव्यू में डॉ. वेदांती यह दावा करते रहे कि विवादित ढांचे को गिराने में उनकी भूमिका थी।
राजनीतिक जीवन
डॉ. रामविलास दास वेदांती भाजपा सांसद भी रहे। वे
- प्रतापगढ़
- जौनपुर की मछलीशहर सीट
से दो बार लोकसभा सांसद चुने गए थे।
निजी जीवन
डॉ. वेदांती का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जब वे दो वर्ष के थे, तभी उनकी मां का निधन हो गया था। उनके पिता राम सुमन त्रिपाठी पेशे से पुरोहित थे। डॉ. वेदांती का नाम उन संतों में लिया जाता है, जिन्होंने धार्मिक जीवन के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संत समाज और उनके अनुयायियों में गहरा शोक है। अयोध्या में आज उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।






