मनरेगा की विदाई, ‘विकसित भारत–जी राम जी’ की एंट्री: रोजगार के दिन बढ़े, नाम बदलने पर सियासी संग्राम

Share your love

संवाद 24, नई दिल्ली।
मोदी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) की जगह एक नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी कर ली है। मौजूदा शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए सूचीबद्ध इस विधेयक का नाम ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] बिल, 2025’ रखा गया है। बिल की प्रति सोमवार को लोकसभा सांसदों के बीच वितरित की गई।

सरकार का कहना है कि यह नया कानून ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा पेश करेगा। प्रस्तावित कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।

मनरेगा होगा पूरी तरह समाप्त

बिल के प्रावधानों के मुताबिक, 2005 में लागू हुए MGNREGA कानून को पूरी तरह रद्द (Repeal) किया जाएगा। नए कानून के लागू होने के बाद देश में केवल VB-G RAM G ही प्रभावी रहेगा। कानून के पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राज्यों को छह महीने के भीतर नई व्यवस्था लागू करनी होगी, जिसमें डिजिटल और बायोमेट्रिक पंजीकरण शामिल होगा।

मजदूरी और शर्तें

नए बिल में मजदूरी दरों को लेकर कोई निश्चित राशि तय नहीं की गई है। केंद्र और राज्य सरकारें पहले की तरह अपने स्तर पर मजदूरी तय करेंगी। रोजगार गारंटी 125 दिन की होगी, लेकिन यह काम मांगने पर और सरकार द्वारा तय सार्वजनिक कार्यों तक सीमित रहेगी।

बोवाई-कटाई में राहत का प्रावधान

बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि बोवाई और कटाई के समय राज्य सरकारें कुछ अवधि के लिए सरकारी काम अस्थायी रूप से रोक सकती हैं, ताकि खेतों में मजदूरों की कमी न हो और कृषि कार्य प्रभावित न हों।

कांग्रेस का विरोध, नाम बदलने पर सवाल

सरकार के इस कदम पर कांग्रेस ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने का तर्क समझ से परे है। उनका कहना है कि नाम बदलने से सरकारी संसाधनों का अनावश्यक खर्च बढ़ता है—दफ्तरों, कागज़ात और स्टेशनरी तक सब कुछ दोबारा बदलना पड़ता है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार पहले भी कई पुरानी योजनाओं के नाम बदल चुकी है और अब मनरेगा के साथ भी वही किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए एक “संजीवनी” रही है और इसके नाम व पहचान को खत्म करना सही नहीं है।

आगे क्या

अब सबकी नजरें संसद की बहस पर टिकी हैं। जहां सरकार इसे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे इतिहास और पहचान बदलने की राजनीति करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विधेयक संसद और सियासत दोनों में गर्म बहस का मुद्दा बना रहने वाला है।

Samvad 24 Office
Samvad 24 Office

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News