देश के पहले नेत्रहीन आर्मी ऑफिसर Lt. Col. सी. द्वारकेश को राष्ट्रीय पुरस्कार
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संवाद 24, संवाददाता। देश के पहले नेत्रहीन सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सी. द्वारकेश को वर्ष 2025 का विकलांगजन राष्ट्रीय पुरस्कार ‘श्रेष्ठ दिव्यांगजन’ श्रेणी में प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया। यह कार्यक्रम विश्व दिव्यांगजन दिवस (3 दिसंबर) के अवसर पर आयोजित किया गया था।
यह पुरस्कार द्वारकेश को उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, देश के प्रति समर्पण और सशस्त्र बलों में समावेशिता को मजबूत करने के योगदान के लिए दिया गया।
एक हादसे ने बदल दी जिंदगी, पर नहीं टूटा हौसला
36 वर्षीय Lt. Col. द्वारकेश ने सेना में रहते हुए 2014 में एक दुर्घटना में अपनी दोनों आंखों की रोशनी खो दी। आखिरी बार उन्होंने एक सैन्य बास्केटबॉल मैच देखा था। घटना के बाद उन्हें 8 महीने अस्पताल में बिताने पड़े।
उनके चेहरे में कई फ्रैक्चर थे—करीब 30 इंप्लांट लगाए गए। बाएं हाथ में 30 सेंटीमीटर का रॉड डाला गया और हिप डिसलोकेशन के कारण वे महीनों तक हिल-डुल भी नहीं पाते थे।
डॉक्टरों ने परिजनों को बता दिया था कि उनकी दृष्टि कभी वापस नहीं आएगी। लेकिन परिवार ने कई सालों तक यह सच्चाई उनसे छिपाए रखी और उम्मीद जगाए रखी कि एक दिन वे फिर देख सकेंगे।
द्वारकेश बताते हैं—
“मैं हर दिन घंटों प्रार्थना करता था कि मेरी आंखों की रोशनी लौट आए और मैं फिर से देश की सेवा कर सकूं।”
सेना ने नहीं छोड़ा साथ, तकनीक और हिम्मत से निभाई ड्यूटी
कठिन स्थितियों के बावजूद सेना ने उन्हें रिटायर नहीं किया। उनमें झुकने से इनकार करने वाली ऊर्जा, तकनीक का बेहतरीन उपयोग और जिम्मेदारियों को पूरा करने का जुनून देखकर उन्हें सेवा में बनाए रखा गया।
वे अपनी सूझ-बूझ, टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षण की मदद से आज भी अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी तरीके से निभा रहे हैं।
खेलों में शुरुआत और पहला मेडल
2018 में खड़की पोस्टिंग के दौरान उन्होंने बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप के पैरालंपिक नोड में पैरा-स्पोर्ट्स शुरू किए।
उन्होंने तैराकी से शुरुआत की और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया।
दुर्घটना के बाद उनका पहला मेडल पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में आया, जिसने उनका आत्मविश्वास लौटाया।

16,000 फीट ऊंचाई वाला सियाचिन ग्लेशियर भी छुआ
अपने असाधारण जज़्बे की बदौलत Lt. Col. द्वारकेश ने सियाचिन ग्लेशियर की 16,000 फीट ऊंचाई भी फतह कर ली—जो किसी नेत्रहीन सैनिक के लिए अद्वितीय उपलब्धि है।






