9 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश और एक हाई-टेक ऑपरेशन, SIR में AI कैसे पकड़ लेता है फर्जी वोटर?

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संवाद 24 संजीव सोमवंशी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष तथा पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर तकनीकी सुधार किए जाते रहे हैं। इसी श्रृंखला में हाल ही में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR (Summary Intensive Revision) प्रक्रिया शुरू की गई है। यदि आपने भी SIR फॉर्म भरा है, तो आपके मन में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न आया होगा कि इतने बड़े पैमाने पर फैली मतदाता सूची में डुप्लीकेट, मृतक या फर्जी वोटर्स का पता कैसे लगाया जाता है?

इस बार चुनाव आयोग ने इस काम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सिस्टम में एकीकृत किया है। आधुनिक डेटा एनालिटिक्स, फेसियल मैचिंग, डी-डुप्लीकेशन एल्गोरिद्म और एडवांस्ड वेरिफिकेशन टूल्स के जरिए अब मतदाता सूची को “मानवीय त्रुटियों से मुक्त” करने का प्रयास किया जा रहा है।

SIR क्या है और क्यों जरूरी है?
SIR यानी Summary Intensive Revision, मतदाता सूची का एक विशेष पुनरीक्षण अभियान है, जिसमें चुनाव आयोग घर-घर जाकर या डिजिटल माध्यम से वोटर डेटा को अपडेट करता है। इसका मुख्य उद्देश्य है –

  • मृतक मतदाताओं को सूची से हटाना
  • दोहराव वाले नामों को निकालना
  • गलत पते वाले या स्थानांतरित मतदाताओं का डेटा सुधरना
  • नए पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना
  • वोटर लिस्ट के पुराने रिकॉर्ड को सुधारना
    हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों से लगातार शिकायतें आ रही थीं कि कुछ इलाकों में फर्जी पते, दोहरी प्रविष्टियां, नकली पहचान, और राजनीतिक कारणों से जोड़ी गई एंट्री मतदाता सूची की विश्वसनीयता को प्रभावित कर रही थीं। यही वजह है कि इस बार SIR प्रक्रिया में AI को एक बड़े हथियार की तरह शामिल किया गया है।

AI कैसे करता है फर्जी वोटर्स की पहचान?
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में कई अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग शुरू किया है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।

फेसियल रिकॉग्निशन आधारित डी-डुप्लीकेशन (Facial Recognition De-duplication)
मतदाता सूची में अक्सर एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज मिल जाता है। पहले यह जांच मैन्युअली होती थी, लेकिन अब AI यह काम बहुत सटीकता से करता है।
AI सिस्टम क्या करता है?

    • एक मतदाता द्वारा दिए गए फोटो को डेटाबेस में मौजूद अन्य हजारों फोटो से मैच करता है।
    • चेहरे की संरचना, अनुपात, आंख-नाक की दूरी, जबड़े का आकार आदि पैरामीटर्स के आधार पर ‘मिलान स्कोर’ तैयार करता है।
    • 90% से अधिक मिलान पाए जाने पर यह एंट्री को “संदिग्ध डुप्लीकेट” के रूप में चिन्हित करता है।
      यह तकनीक विशेष रूप से उन राज्यों में उपयोगी है जहां प्रवासन अधिक है और लोग कई स्थानों पर पंजीकरण करा लेते हैं।

    बायोमेट्रिक-आधारित पैटर्न मैचिंग
    हालांकि मतदाता पंजीकरण में बायोमेट्रिक अनिवार्य नहीं है, लेकिन आधार संख्या (जहां उपलब्ध हो) का अप्रत्यक्ष उपयोग करके AI पैटर्न मैचिंग करता है।
    AI किन चीजों की पहचान करता है?

      • एक ही मोबाइल नंबर का कई वोटर्स में उपयोग
      • एक ही पते पर असामान्य रूप से बड़ी संख्या में मतदाता
      • आधार और वोटर ID में बड़े अंतर
      • उम्र में असामान्य पैटर्न (जैसे 10 लोगों की उम्र बिल्कुल एक समान होना)
        ये संकेत सिस्टम को शक वाली एंट्री को हाइलाइट करते हैं।

      एड्रेस वेरिफिकेशन एल्गोरिद्म (Address Validation AI)
      फर्जी मतदाता अक्सर नकली या अस्थायी पते का उपयोग करते हैं। SIR प्रक्रिया में AI इन पते की जांच स्वचालित रूप से करता है।
      AI कैसे जांचता है?

        • गूगल मैप्स-जैसे जियोकोडिंग सिस्टम से पता मिलान करता है।
        • यदि किसी पते पर भौतिक रूप से कमरे/दुकान/खाली प्लॉट का रिकॉर्ड मिलता है, तो इसे फ्लैग करता है।
        • घर/दुकान नंबर सीक्वेंस का मिलान करके असामान्य या अस्तित्वहीन पतों की पहचान करता है।
          इस तकनीक से उन इलाकों में बड़ा फायदा मिलता है जहां राजनीतिक रूप से वोटर जोड़ने के लिए नकली पते दिए जाते रहे हैं।

        डुप्लीकेट सूची मिली-जुली पहचान (Multi-State Duplicate Detection)
        पहले राज्यों के बीच डेटा साझा नहीं होता था, जिससे एक व्यक्ति दो राज्यों में भी वोटर बन जाता था। लेकिन अब AI ने इंटर-स्टेट डेटा सिंक्रोनाइजेशन को आसान बना दिया है।
        AI इन डेटा को आपस में मिलाकर देखता है:

          • नाम
          • पिता/पति का नाम
          • आयु
          • फोटोग्राफ
          • मोबाइल
          • आधार (स्वैच्छिक)
            यदि 3 या उससे अधिक पैरामीटर मैच करते हैं, तो सिस्टम इसे ‘संभावित डुप्लीकेट’ के रूप में दर्ज करता है।

          मृतक मतदाताओं की पहचान (Deceased Voter Identification)
          देश में लाखों मृतक मतदाताओं के रिकॉर्ड लंबे समय तक हट नहीं पाते। AI अब इसे भी तेज बना रहा है।
          AI क्या करता है?

            • राज्य सरकारों के मृत्यु रजिस्टर से डेटा तुलना
            • अस्पताल/नगर निकाय के मृत्यु प्रमाणपत्र डेटाबेस का डिजिटल मैच
            • उम्र 110 वर्ष से अधिक दिखने वाली एंट्री को ‘संदिग्ध’ मानना
            • परिवार के सदस्य द्वारा भरे गए SIR फॉर्म को तत्काल अपडेट करना
              इससे वोटर सूची की गुणवत्ता कई गुना सुधरती है।

            मशीन लर्निंग आधारित रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन (ML Fraud Detection)
            AI लगातार नए डेटा से सीखता है और संदिग्ध पैटर्न को पहचानने में और बेहतर होता जाता है। सिस्टम किन-किन पैटर्न्स को ट्रैक करता है?

              • एक ही IP से एक साथ बड़ी संख्या में फॉर्म भरना
              • कुछ इलाकों से अचानक असामान्य रूप से नए वोटर्स की एंट्री
              • एक ही मोबाइल/ईमेल से लगातार दर्जनों आवेदन
              • अविश्वसनीय दस्तावेज अपलोड होना
                ये सभी ‘फ्रॉड पोटेंशियल’ अलर्ट उत्पन्न करते हैं जिससे मानवीय टीम तुरंत जांच कर सके।

              SIR प्रक्रिया में फील्ड-लेवल वेरिफिकेशन + AI का संयुक्त मॉडल
              चुनाव आयोग ने SIR में “AI + मानव सत्यापन” का हाइब्रिड मॉडल अपनाया है।
              इस मॉडल में क्या होता है?

              • AI पहले मशीन-लेवल पर संदिग्ध प्रविष्टियों की सूची बनाता है
              • फील्ड बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उन घरों पर जाकर भौतिक सत्यापन करते हैं
              • यदि एंट्री गलत पाई जाती है, तो उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू होती है
              • यदि एंट्री सही पाई जाती है, तो इसे ‘validated’ टैग मिल जाता है
                इससे सिस्टम में त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।

              AI से मतदाता सूची को बेहतर बनाने के फायदे
              ✔ मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय और सटीक होगी
              डुप्लीकेट हटने से चुनाव परिणाम अधिक पारदर्शी बनेंगे।
              ✔ फर्जी वोटिंग का खतरा कम होगा
              मल्टीपल वोटर ID रखने वाले लोग पहचाने जाएंगे।
              ✔ मृतक और स्थानांतरित लोगों के रिकॉर्ड समय पर हटेंगे
              इससे सटीक निर्वाचन रोल तैयार होगा।
              ✔ चुनाव की विश्वसनीयता बढ़ेगी
              AI के उपयोग से राजनीतिक विवाद भी कम होंगे।
              ✔ तेज़ और लागत प्रभावी प्रक्रिया
              जहां पहले 6–8 महीने लगते थे, अब यह काम हफ्तों में पूरा हो जाता है।

              AI के उपयोग को लेकर सुरक्षा और गोपनीयता उपाय
              चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि –

              • नागरिकों का डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रखा जाए
              • आधार और वोटर डेटा को सीधे लिंक न किया जाए
              • व्यक्तिगत जानकारी किसी बाहरी एजेंसी से साझा न हो
                AI केवल डुप्लीकेशन और डेटा वैलिडेशन के लिए उपयोग हो
                इससे मतदाता की गोपनीयता सुरक्षित बनी रहती है।

              SIR प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भारतीय चुनाव प्रणाली का एक बड़ा तकनीकी सुधार है। इससे चुनाव आयोग को मतदाता सूची की सफाई, फर्जी वोटर्स की पहचान, मृतक और डुप्लीकेट एंट्री हटाने में अभूतपूर्व सहायता मिल रही है।

              भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में जहां करोड़ों वोटर्स हैं, वहां AI की सहायता से चुनाव व्यवस्था और अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बन रही है। SIR का यह हाई-टेक मॉडल आने वाले वर्षों में पूरे देश में मानक प्रक्रिया बन सकता है।

              यदि आपने SIR फॉर्म भरा है, तो समझ लीजिए कि आपका डेटा अब एक आधुनिक, सुरक्षित और हाई-टेक प्रणाली में जांचा जा रहा है, जो भारत के चुनावों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है

              Samvad 24 Office
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