दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्रिकेट सट्टेबाजी से कमाया हर मुनाफा ‘अपराध’,
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Samvad 24 News
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों की याचिकाएं खारिज करते हुए साफ कहा कि जिस रैकेट की बुनियाद ही अपराध पर टिकी हो, उससे होने वाला हर लाभ भी अपराध माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही सट्टेबाजी खुद PMLA के तहत अपराध नहीं है, लेकिन इस नेटवर्क से जुड़ी कमाई को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं—मुकेश कुमार, उमेश चौटालिया, नरेश बंसल, घनश्याम भाई पटेल और अन्य—ने ईडी द्वारा जारी की गई अस्थायी अटैचमेंट और नोटिस को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि क्रिकेट सट्टेबाजी PMLA में सूचीबद्ध अपराध नहीं, इसलिए उनकी संपत्तियों को अवैध कमाई नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने इन दलीलों को करते हुए कहा कि पूरा रैकेट डिजिटल फर्जीवाड़े, हवाला नेटवर्क, फर्जी केवाईसी और बिना दस्तावेज वाले ‘सुपर मास्टर लॉगिन’ पर आधारित था, जो मुख्य अपराध की जड़ हैं। अदालत ने टिप्पणी की—“जब पेड़ ही जहरीला हो, तो फल कैसे वैध माना जा सकता है।”
PMLA अथॉरिटी एक सदस्य के आधार पर भी वैध
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अटैचमेंट जांच के लिए बनाई गई PMLA एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी तीन सदस्यों के पूर्ण पैनल के बिना भी वैध रूप से काम कर सकती है। एक सदस्य के होते हुए भी नोटिस, सुनवाई और आदेश जारी किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी करने के लिए संपत्ति का पहले से अटैच होना आवश्यक नहीं। दोनों प्रक्रियाएं स्वतंत्र हैं—कभी नोटिस पहले और अटैचमेंट बाद में होती है, और कभी इसके उलट।
संबंधित मुद्दा: ऑनलाइन गेमिंग पर केंद्र का हलफनामा
हाल ही में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि अनरेगुलेटेड ऑनलाइन मनी-गेम ऐप्स का संबंध मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और यहां तक कि टेरर फाइनेंसिंग से जुड़ चुका है। सरकार ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन पैसों वाले खेल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं, इसलिए इन्हें रेगुलेट करना बेहद जरूरी है।






