INS माहे कैसे बदल देगा भारत की ASW रणनीति,नौसेना में शामिल हुआ ‘साइलेंट हंटर’

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संवाद 24 मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती देते हुए, स्वदेशी रूप से निर्मित ‘माहे-श्रेणी’ के पहले पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जलयान (ASW-SWC) आईएनएस माहे (INS Mahe) को सोमवार को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया।

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत यह जलावतरण देश की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित, आईएनएस माहे को नौसेना ने आधिकारिक तौर पर ‘मौन शिकारी’ (Silent Hunter) नाम दिया है, जो उथले और तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए इसकी विशेष क्षमताओं को दर्शाता है।

थल सेनाध्यक्ष ने किया जलावतरण
इस महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने की। यह पहली बार है जब किसी जलावतरण समारोह की अध्यक्षता थल सेना प्रमुख ने की हो, जो भारतीय सशस्त्र बलों के बीच बढ़ती हुई ‘सिनेर्जी’ (तालमेल) और संयुक्तता का प्रतीक है।

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (FOC-in-C) वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी इस अवसर पर मौजूद रहे। जनरल द्विवेदी ने आईएनएस माहे के जलावतरण को न केवल नौसेना के युद्ध क्रम में एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म का आगमन बताया, बल्कि स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके जटिल युद्धपोतों को डिजाइन, निर्माण और तैनात करने की राष्ट्र की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण बताया।

आईएनएस माहे: तटीय सुरक्षा का नया आयाम
आईएनएस माहे (P80) एक नई पीढ़ी का तटीय युद्धक पोत है, जिसे विशेष रूप से भारत के तटीय क्षेत्रों (Littorals) और उथले पानी में पनडुब्बी का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और बेअसर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ बड़े युद्धपोत प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते हैं।

प्रमुख भूमिका: पनडुब्बी रोधी युद्ध, तटीय गश्त, जल के भीतर निगरानी और समुद्री सुरंग बिछाना (mine-laying)।
स्वदेशी सामग्री: यह पोत 80% से अधिक स्वदेशी उपकरणों और प्रणालियों से निर्मित है, जिसमें एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सूट, सोनार, और हथियार प्रणालियाँ शामिल हैं।

आईएनएस माहे की तकनीकी क्षमताएँ

  1. लक्ष्य और भूमिका (Mission and Role)
    आईएनएस महे की प्राथमिक भूमिका उथले पानी (Shallow Water) और भारत के तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) करना है। पारंपरिक रूप से बड़े युद्धपोत इन क्षेत्रों में पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो पाते। यह पोत इन संवेदनशील जलमार्गों की सुरक्षा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    पनडुब्बी रोधी युद्ध: दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उन्हें ट्रैक करना और नष्ट करना।
    समुद्री निगरानी: तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों के प्रवेश मार्गों की निगरानी और गश्त करना।
    माइन वारफेयर: समुद्री सुरंगें बिछाना और/या उन्हें निष्क्रिय करने के अभियानों में सहायता करना।
  2. प्लेटफ़ॉर्म विशेषताएँ (Platform Specifications)
    विस्थापन (Displacement) – लगभग 900-1100 टन, छोटा आकार तटीय जल में बेहतर संचालन सुनिश्चित करता है।
    लंबाई (Length) – लगभग 78 मीटर, छोटे आकार के बावजूद आवश्यक उपकरण वहन करने की क्षमता।
    गति (Speed) – लगभग 25 नॉट्स (46 किमी/घंटा) उच्च गति से प्रतिक्रिया करने और गश्त करने की क्षमता।
    ड्राफ्ट (Draft) – 3 मीटर से कम, उथले पानी में संचालन के लिए आवश्यक, यह पोत को तट के करीब जाने की अनुमति देता है।
    प्रोपेल्शन – तीन वाटरजेट्स (Tri-Water Jet Propulsion) पारंपरिक प्रोपेलर की तुलना में बेहतर मैन्यूवेरेबिलिटी (चालन क्षमता) प्रदान करता है, खासकर उथले पानी में।
  3. हथियार एवं सेंसर प्रणालियाँ (Weapon and Sensor Systems)
    आईएनएस महे उच्च तकनीक वाले स्वदेशी सेंसर और हथियार प्रणालियों से लैस है जो इसे एक घातक ‘मौन शिकारी’ बनाते हैं।
    पनडुब्बी रोधी हथियार (ASW Weapons):
    टॉरपीडो ट्यूब्स:
    इसमें लाइटवेट ध्वनिक-होमिंग टॉरपीडो फायर करने की क्षमता है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों को सटीक रूप से निशाना बना सकते हैं।
    एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर (ASW-RL): पानी के नीचे के लक्ष्यों को तेजी से और गहराई तक निशाना बनाने के लिए शक्तिशाली रॉकेटों का उपयोग।
    सोनार (SONAR) सिस्टम: पोत पर विशेष रूप से उथले पानी के लिए डिज़ाइन किए गए हाई-फ्रीक्वेंसी एक्टिव और पैसिव सोनार लगाए गए हैं। ये पानी के नीचे पनडुब्बियों और अन्य लक्ष्यों का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करते हैं।
    कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS):
    इसमें एक स्वदेशी इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगा है। यह प्रणाली सभी सेंसर और हथियारों से प्राप्त डेटा को एक केंद्रीकृत डिस्प्ले पर एकीकृत करती है, जिससे कमांड टीम को तेजी से निर्णय लेने और सटीक हमला करने में मदद मिलती है।
    आत्मरक्षा हथियार (Self-Defence):
    पोत को हवाई खतरों और सतह के लक्ष्यों से बचाने के लिए 30 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) या इसी तरह की स्वदेशी बंदूकें/रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन (RCWS) शामिल हैं।
  4. स्टील्थ और स्वदेशीकरण (Stealth and Indigenization)
    ‘मौन शिकारी’ नाम इसकी स्टील्थ (Stealth) विशेषताओं के कारण दिया गया है, जो इसकी परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाती हैं।
    स्टील्थ डिज़ाइन: इसके रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) को कम करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
    कम ध्वनिक हस्ताक्षर: Waterjet प्रोपेलर और विशेष शोर-दमन तकनीकों का उपयोग करने से पानी के नीचे इसका ध्वनिक हस्ताक्षर (Acoustic Signature) कम हो जाता है, जिससे यह चुपके से कार्य कर पाता है।
    उच्च स्वदेशीकरण: पोत में लगभग 80% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह न केवल ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रमाण है, बल्कि भविष्य में रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता के लिए देश की निर्भरता को भी कम करता है।

आईएनएस माहे की ये विशिष्ट तकनीकी क्षमताएं इसे भारतीय नौसेना के तटीय बेड़े में एक अनिवार्य और बहुमुखी युद्धपोत बनाती हैं।

आईएनएस माहे का नाम मालाबार तट पर स्थित तटीय शहर माहे के नाम पर रखा गया है। जहाज का क्रेस्ट कलरीपयट्टु में उपयोग की जाने वाली लचीली तलवार ‘उरुमी’ को दर्शाता है, जो पोत की चपलता और घातक प्रभावशीलता को प्रतिबिंबित करता है। आईएनएस माहे आठ ASW-SWC पोतों की श्रृंखला का पहला पोत है, जिसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इसका कमीशनिंग पश्चिमी समुद्र तट पर नौसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाएगा और भारत की तटीय सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करेगा, जिससे यह क्षेत्र में किसी भी उप-सतह खतरे का मुकाबला करने वाली पहली पंक्ति बन जाएगा।

Samvad 24 Office
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