फारूक अब्दुल्ला बोले, ऑपरेशन सिंदूर से कुछ हासिल नहीं, उम्मीद है दोबारा नहीं होगा
Share your love

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से कोई निष्कर्ष नहीं निकला और उम्मीद है कि अब इस तरह की कार्रवाई दोबारा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में हमारे 18 लोग मारे गए और सीमाओं को लेकर भी कई तरह की चूक सामने आई।
दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र करते हुए फारूक अब्दुल्ला बोले कि हर घटना के बाद हर कश्मीरी पर शक की उंगली उठ जाती है। उन्होंने कहा कि यह दिन कब आएगा जब हमें बिना शर्त हिंदुस्तानी माना जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर डॉक्टरों को ऐसा रास्ता अपनाने की नौबत क्यों आई। इसकी पूरी जांच और गहन अध्ययन जरूरी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने नौगाम थाने में हुए धमाके को लेकर कहा कि यह हमारी गलती थी। जो लोग विस्फोटकों को बेहतर ढंग से हैंडल करना जानते हैं, उनसे सलाह लेनी चाहिए थी। बिना विशेषज्ञता के इन चीजों में हस्तक्षेप करने का नतीजा यह हुआ कि नौ लोगों ने अपनी जान गंवा दी और कई घरों को नुकसान पहुंचा।
नौगाम थाने में विस्फोट: 9 की मौत, 32 घायल
दिल्ली ब्लास्ट केस में फरीदाबाद से जब्त किए गए 360 किलो विस्फोटक में 14 नवंबर की रात नौगाम थाना परिसर में धमाका हो गया। इसमें 9 लोगों की मौत हुई और 32 घायल हुए, जिनमें 27 पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह विस्फोटक अल फलाह यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और आतंकी डॉ. मुजम्मिल से बरामद हुआ था।
थाने में रात 11:20 बजे फोरेंसिक टीम सैंपल ले रही थी, तभी ब्लास्ट हो गया। अगले दिन सुबह मृतकों की पहचान हुई, जिनमें 3 फोरेंसिक एक्सपर्ट, SIA का इंस्पेक्टर, नायब तहसीलदार, दो पुलिस फोटोग्राफर और तीन नागरिक शामिल थे। धमाका इतना तेज था कि 800 मीटर दूर तक खिड़कियां टूट गईं और थाना लगभग जर्जर हो गया।
पुलिस और गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आतंकी हमला नहीं बल्कि हादसा था। विस्फोटक में अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर पाए गए थे।
दिल्ली ब्लास्ट केस में तीन डॉक्टर गिरफ्तार
दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी। जांच में ब्लास्ट का लिंक फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आया। कार चलाने वाला आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद नबी भी धमाके में मारा गया। वह पुलवामा का रहने वाला था।
अब तक यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि देशभर से करीब 15 डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया है। कई डॉक्टरों के आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के प्रमाण मिलने के बाद जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।






