पहले तेज प्रताप बेदखल, अब रोहिणी ने तोड़ा नाता: लालू परिवार में दरार गहराई
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पटना/लखनऊ: बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का परिवार एक नए संकट में घिर गया है। चुनावी झटकों के बीच उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने स्वयं को परिवार और राजद—दोनों से अलग करने की घोषणा कर दी है। इसे महागठबंधन के खराब प्रदर्शन का सीधा असर माना जा रहा है।
मतगणना की शुरुआत शुक्रवार सुबह हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि दिन के अंत तक सत्ता उनके पास लौट आएगी, लेकिन जैसे-जैसे रुझान आते गए, निराशाजनक स्थितियां सामने आती रहीं। प्रस्तावित मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने क्षेत्र राघोपुर में लगातार पिछड़ते दिखाई दे रहे थे।
बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पहले ही चुनाव हार चुके थे और महागठबंधन सत्ता से दूर होता दिख रहा था। अंततः देर रात यह राहत मिली कि तेजस्वी अपनी सीट बचाने में सफल रहे, लेकिन चुनावी हार ने परिवार में निराशा बढ़ा दी।
शनिवार को एक और बड़ा झटका तब सामने आया जब लालू प्रसाद यादव को किडनी दान कर सुर्खियों में आईं बेटी रोहिणी आचार्य ने स्पष्ट रूप से पार्टी और परिवार से अलग होने की घोषणा कर दी। यह परिवार का दूसरा बड़ा विभाजन है, क्योंकि इससे पहले लालू प्रसाद अपने बड़े बेटे तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से बेदखल कर चुके थे।
रोहिणी का कदम भी तेज प्रताप की नाराजगी से जुड़ा माना जा रहा है। चुनाव परिणामों से वह बेहद दुखी हैं और तेज प्रताप की तरह उन्होंने भी राजद की हार के लिए राज्यसभा सदस्य और तेजस्वी के करीबी सलाहकार संजय यादव को जिम्मेदार बताया है।
शनिवार को रोहिणी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे संजय यादव और रमीज के कहने पर यह कदम उठा रही हैं। रमीज उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और संजय यादव की टीम से जुड़े हुए बताए जाते हैं।
रोहिणी की राजनीतिक भूमिका
रोहिणी आचार्य ने अब तक सीमित राजनीतिक सक्रियता दिखाई है। वह 2024 लोकसभा चुनाव में छपरा से राजद की उम्मीदवार थीं, लेकिन चुनाव हार गईं। विधानसभा चुनाव के दौरान वे राघोपुर पहुंचकर तेजस्वी यादव के लिए प्रचार करने गई थीं। तेज प्रताप के क्षेत्र महुआ नहीं पहुंचीं, हालांकि उन्होंने उन्हें जीत की शुभकामनाएं अवश्य दी थीं।






