दिल्ली धमाका आत्मघाती हमला था, जांच एनआईए को सौंपी गई
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लाल किला पार्किंग में घंटों तक रुका था संदिग्ध उमर, सीसीटीवी फुटेज में हुआ खुलासा
संवाद 24 संवाददाता। नई दिल्ली
दिल्ली में हुआ हालिया धमाका अब आत्मघाती हमले की साजिश के रूप में सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी डॉ. उमर अहमद ने इस धमाके को अंजाम दिया था। घटना में इस्तेमाल विस्फोटक की बरामदगी के बाद मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और एनआईए की संयुक्त टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि विस्फोटक अत्याधुनिक श्रेणी का था और इसे आत्मघाती हमले के उद्देश्य से तैयार किया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉ. उमर धमाके से पहले करीब तीन घंटे तक लाल किला परिसर की पार्किंग में मौजूद था। सीसीटीवी फुटेज में उसकी गतिविधियाँ दर्ज हुई हैं।
एनआईए की टीम ने बताया कि उमर और उसके सहयोगी डॉ. मुनीम अहमद तथा डॉ. शाहीन अल फलाह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे और इन्हें जैश के स्लीपर सेल के रूप में सक्रिय किया गया था।
आतंकियों पर एनएसजी की टीम ने किया बम निष्क्रिय
घटना के बाद एनएसजी की बम निरोधक टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध सिलेंडर जैसे विस्फोटक को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया। सूत्रों के अनुसार, विस्फोटक में आरडीएक्स और एल्युमिनियम पाउडर का इस्तेमाल हुआ था।
प्रधानमंत्री ने कहा – आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जो लोग देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर कहा कि इस घटना की जांच एनआईए को सौंप दी गई है और दोषियों को जल्द न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।
मुख्य संदिग्धों की पहचान
- डॉ. आदिल अहमद रशिद, उम्र 28 वर्ष – अलीगढ़ निवासी, जैश का प्रमुख मास्टरमाइंड।
- डॉ. मुनीम अहमद गनी, उम्र 31 वर्ष – बरेली निवासी, विस्फोटक बनाने में विशेषज्ञ।
- डॉ. उमर अहमद, उम्र 26 वर्ष – लखनऊ निवासी, लैब तकनीशियन और कथित आत्मघाती हमलावर।
- डॉ. शाहीन अल फलाह, उम्र 27 वर्ष – महिला सदस्य, जैश के संपर्क सूत्र के रूप में सक्रिय।
संवाद 24 टिप्पणी:
यह घटना राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। शिक्षा संस्थानों में सक्रिय स्लीपर सेल की मौजूदगी खुफिया तंत्र के लिए चुनौती है। देश की सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी निगरानी और इंटेलिजेंस नेटवर्क को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी साजिशें समय रहते नाकाम की जा सकें।






