वाहनों की फिटनेस जांच में फर्जीवाड़ा, केंद्र सरकार के लिए बनी बड़ी चुनौती
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नई दिल्ली। संवाद 24 ब्यूरो।
देश में हर वर्ष सड़क हादसों में करीब दो लाख लोगों की जान चली जाती है। इन दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण असुरक्षित और खराब स्थिति वाले वाहन हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने सड़कों पर अनफिट वाहनों के संचालन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी की है।
परंतु अब यह सामने आ रहा है कि जिन ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) के भरोसे यह प्रक्रिया चल रही है, उनमें भी भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की जड़ें गहरी हैं। कई स्थानों पर बिना जांच किए वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, जिससे न केवल सड़क सुरक्षा खतरे में है बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सामने आए फर्जी प्रमाणपत्र के मामले
हाल ही में उत्तर प्रदेश में जून 2025 के दौरान हुए एक सड़क हादसे में यह खुलासा हुआ कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को गलत तरीके से फिट घोषित किया गया था। जांच में पाया गया कि ट्रक का फिटनेस प्रमाणपत्र उत्तराखंड के एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन से जारी किया गया था, जबकि वाहन वहीं खड़ा खराब स्थिति में था।
इसी तरह के मामले राजस्थान सहित कई राज्यों से भी सामने आए हैं।
सरकार सख्त, नए नियम बनाने की तैयारी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अब इस पूरे सिस्टम की समीक्षा में जुट गया है। मंत्रालय का कहना है कि 2024 से लागू किए गए नए प्रावधानों के तहत सभी वाहनों के फिटनेस टेस्ट में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन लगातार मिल रहे फर्जीवाड़े के मामलों ने इसकी साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सरकार अब ऐसे ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की निगरानी और सत्यापन के लिए नई नीति बनाने पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों की मानें तो केंद्र को इन स्टेशनों के संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका सीमित करनी चाहिए, क्योंकि कई जगहों पर निजी स्वार्थ के चलते फिटनेस रिपोर्ट में धांधली के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
परिवहन विशेषज्ञों की राय
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा से जुड़ी इस लापरवाही को रोकना अत्यंत आवश्यक है। गलत फिटनेस रिपोर्ट के कारण हादसे बढ़ रहे हैं और जिम्मेदार एजेंसियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो सरकार का सड़क सुरक्षा मिशन कमजोर पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु
- ???? ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर फिटनेस जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा
- ???? उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में ट्रकों को गलत प्रमाणपत्र जारी करने के मामले
- ⚙️ केंद्र सरकार नए नियम और निगरानी तंत्र बनाने की तैयारी में
- ???? परिवहन विशेषज्ञ बोले – “गलत फिटनेस रिपोर्ट सड़क सुरक्षा के लिए खतरा”






