बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी भूचाल: ओवैसी ने तोड़ा साथ, अब अकेले मैदान में AIMIM
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संवाद 24 पश्चिम बंगाल। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन अचानक खत्म कर दिया है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
अचानक क्यों टूटा गठबंधन?
जानकारी के मुताबिक, यह फैसला एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद लिया गया। इस वीडियो में हुमायूं कबीर पर कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान देने और राजनीतिक सौदेबाजी से जुड़े आरोप लगे हैं। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। AIMIM ने साफ कहा कि वह ऐसे किसी भी बयान या गतिविधि के साथ नहीं जुड़ सकती, जिससे समुदाय की छवि या हितों पर सवाल उठे। इसी कारण पार्टी ने तुरंत गठबंधन खत्म करने का निर्णय लिया।
ओवैसी का सख्त रुख
पार्टी की ओर से जारी बयान में संकेत दिया गया कि हालिया घटनाओं ने यह दिखाया है कि बंगाल के मुसलमान कितने संवेदनशील हालात में हैं। ऐसे में AIMIM ने खुद को इस विवाद से अलग करना बेहतर समझा। यह फैसला बताता है कि ओवैसी किसी भी तरह की राजनीतिक छवि को लेकर जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं, खासकर चुनाव से ठीक पहले।
अब अकेले चुनाव लड़ेगी AIMIM
गठबंधन टूटने के साथ ही AIMIM ने यह भी साफ कर दिया है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब अकेले ही मैदान में उतरेगी। इससे पहले AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब इस फैसले से न सिर्फ सीटों के बंटवारे की रणनीति बदलेगी, बल्कि वोट बैंक पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
विवादित वीडियो से बढ़ी सियासी गर्मी
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में कथित तौर पर बड़े आर्थिक लेन-देन और चुनावी रणनीति की बातें सामने आई हैं, जिसने विपक्षी दलों को भी हमलावर बना दिया है। वहीं, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश बताया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
चुनावी समीकरण पर बड़ा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से बंगाल में खासकर मुस्लिम वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। AIMIM के अकेले चुनाव लड़ने से वोटों का बंटवारा होने की संभावना भी बढ़ गई है, जिसका फायदा अन्य पार्टियां उठा सकती हैं।
सियासत में बढ़ी अनिश्चितता
चुनाव से पहले गठबंधन टूटना इस बात का संकेत है कि बंगाल की राजनीति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। आने वाले दिनों में और भी बड़े राजनीतिक फैसले देखने को मिल सकते हैं।






