डीयू में अटका भविष्य: गवर्निंग बॉडी की देरी से 700 शिक्षकों की भर्ती पर ब्रेक

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संवाद 24 नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े कई कॉलेजों में प्रशासनिक ढिलाई अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ती नजर आ रही है। राजधानी के 12 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी का गठन न होने के कारण करीब 700 स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति अटक गई है। इस स्थिति ने न सिर्फ शिक्षकों बल्कि छात्रों के भविष्य को भी अनिश्चितता में डाल दिया है।

700 पद खाली, एडहॉक सिस्टम पर निर्भर कॉलेज
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से स्थायी नियुक्तियां न होने के कारण कॉलेजों में शिक्षण कार्य एडहॉक और गेस्ट फैकल्टी के भरोसे चल रहा है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और नियमित व्यवस्था बनाने में दिक्कत आ रही है। स्थायी शिक्षकों की कमी के चलते कई विभागों में कार्यभार असंतुलित हो गया है।

गवर्निंग बॉडी न बनने से रुका पूरा सिस्टम
इन कॉलेजों में नियुक्ति प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब गवर्निंग बॉडी का गठन हो। लेकिन यही प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। गवर्निंग बॉडी के अभाव में न सिर्फ भर्ती, बल्कि कई अहम प्रशासनिक फैसले भी लंबित पड़े हैं, जिससे संस्थानों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।

शिक्षकों में बढ़ रहा असंतोष और असुरक्षा
एडहॉक और अस्थायी शिक्षकों के बीच इस देरी को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्हें नौकरी की स्थिरता नहीं मिल पा रही, जिससे मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। कई शिक्षक वर्षों से स्थायी नियुक्ति की उम्मीद में काम कर रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।

छात्रों की पढ़ाई पर भी असर
इस स्थिति का सीधा असर छात्रों पर भी पड़ रहा है। बार-बार फैकल्टी बदलने से पढ़ाई की निरंतरता टूटती है और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। कई कोर्स में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी भी देखने को मिल रही है।

सरकार और विश्वविद्यालय के बीच अटका मामला
सूत्रों के मुताबिक, गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाएं और विभिन्न स्तरों पर समन्वय की कमी बड़ी वजह है। दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय के बीच नामांकन और अनुमोदन की प्रक्रिया में देरी से पूरा मामला अटका हुआ है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब डीयू में नियुक्तियों को लेकर विवाद या देरी सामने आई हो। इससे पहले भी कई बार भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक फैसलों में देरी को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ता रहा है।

बड़ा सवाल – कब मिलेगी राहत?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन 700 पदों पर नियुक्तियां कब शुरू होंगी। क्या गवर्निंग बॉडी का गठन जल्द होगा या यह मामला और लंबा खिंचेगा? फिलहाल, शिक्षक और छात्र दोनों ही इस अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं और समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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