10 महीने की चुप्पी, 260 मौतें और एक ब्लैक बॉक्स का राज! आखिर क्यों छिपाई जा रही है AI-171 हादसे की सच्चाई
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संवाद 24 डेस्क। देश को हिला देने वाले एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 हादसे को करीब 10 महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस त्रासदी की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। अब इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो चुके परिवारों का धैर्य जवाब दे चुका है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल करते हुए ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है।
उड़ान के कुछ सेकंड बाद ही मौत का मंजर
12 जून 2025 का दिन कई परिवारों के लिए हमेशा के लिए एक दर्दनाक याद बन गया। अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही क्षणों बाद AI-171 विमान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और कई परिवार एक झटके में उजड़ गए। घटना इतनी भयावह थी कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई, लेकिन वक्त बीतने के साथ यह सवाल और गहरा होता गया, आखिर यह हादसा हुआ कैसे?
परिजनों की सीधी अपील, हमें सच चाहिए
अब पीड़ित परिवारों ने एकजुट होकर देश के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनका कहना है कि उन्हें मुआवजे से ज्यादा जरूरत सच्चाई की है। परिजनों ने मांग की है कि विमान के ब्लैक बॉक्स में रिकॉर्ड सभी डेटा को सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह साफ हो सके कि उनके अपने किन हालात में इस दुनिया से विदा हुए।
ब्लैक बॉक्स में छिपा है हादसे का पूरा सच
विमान का ब्लैक बॉक्स एक ऐसा उपकरण होता है, जिसमें उड़ान से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी रिकॉर्ड होती है, पायलट की बातचीत, तकनीकी संकेत और उड़ान के हर पल का डेटा। परिवारों का मानना है कि इसी डेटा में हादसे की असली वजह छिपी है। अगर इसे सामने लाया जाए, तो यह साफ हो सकता है कि दुर्घटना तकनीकी खराबी से हुई या किसी मानवीय चूक का नतीजा थी।
पैसे नहीं, जवाब चाहिए, दर्द से भरी आवाजें
हादसे के बाद सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से आर्थिक सहायता जरूर दी गई, लेकिन इससे परिजनों का दर्द कम नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब तक उन्हें यह नहीं पता चलेगा कि उनके अपनों के साथ आखिर क्या हुआ, तब तक उन्हें सुकून नहीं मिलेगा। उनके लिए यह मामला सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि न्याय और सच्चाई का है।
सामान तक की पहचान बना दर्दनाक अनुभव
हादसे के बाद मृतकों के सामान को पहचानना भी परिवारों के लिए एक बेहद भावनात्मक और मुश्किल प्रक्रिया साबित हुआ। कई लोगों ने बताया कि अपने प्रियजनों की चीजें ढूंढना और उन्हें पहचानना किसी डरावने सपने से कम नहीं था। इस दौरान उन्हें पर्याप्त सहयोग भी नहीं मिल पाया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई।
जांच में देरी से बढ़ा शक और गुस्सा
करीब 10 महीने बीत जाने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो पाई है। इस देरी ने परिजनों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका मानना है कि अगर जांच में पारदर्शिता होती और समय पर जानकारी साझा की जाती, तो उनका भरोसा बना रहता। अब वे इस पूरे मामले में स्पष्टता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय गलती? गुत्थी उलझी
शुरुआती जांच में कई संभावनाओं पर चर्चा हुई, कभी तकनीकी खराबी की बात सामने आई तो कभी पायलट से जुड़ी आशंकाएं जताई गईं। लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यही वजह है कि यह हादसा एक रहस्य बनकर रह गया है, जिसे सुलझाने की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।
न्याय की आस में टिकी निगाहें
आज भी पीड़ित परिवारों की उम्मीदें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। उनकी मांग साफ है
हादसे की सच्चाई सामने आए
जिम्मेदारों की पहचान हो
और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो
क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसा जख्म है जो हर दिन ताजा हो जाता है।






