अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा: बेटे की सलामती के लिए मां ने बेटी की दे दी बलि, झारखंड में सनसनी
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संवाद 24 झारखंड। हजारीबाग जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास के अंधेपन में एक मां ने अपनी ही नाबालिग बेटी की बलि चढ़ा दी। इस जघन्य घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है और समाज में फैले अंधविश्वास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बेटे को बचाने के नाम पर ली बेटी की जान
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी महिला ने अपने बेटे की सलामती और बीमारी से छुटकारा पाने के लिए यह खौफनाक कदम उठाया। बताया जा रहा है कि महिला किसी तांत्रिक और अपने कथित प्रेमी के संपर्क में थी, जिन्होंने उसे इस तरह की बलि देने के लिए उकसाया। इस अंधविश्वास के चलते महिला ने अपनी करीब 13 वर्षीय मासूम बेटी की हत्या कर दी, जिससे पूरे गांव में डर और गुस्से का माहौल बन गया है।
तांत्रिक और प्रेमी की भूमिका भी सामने आई
जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में महिला अकेली नहीं थी। एक तांत्रिक (भगतिन) और महिला का प्रेमी भी इस साजिश में शामिल थे। तीनों ने मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
पुलिस ने किया खुलासा, इलाके में दहशत
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनसे साफ हुआ कि यह हत्या पूरी तरह से अंधविश्वास और बहकावे का परिणाम थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पहले से सोची-समझी साजिश के तहत इसे अंजाम दिया गया।
अंधविश्वास बना समाज के लिए खतरा
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि देश के कई हिस्सों में आज भी अंधविश्वास गहराई से जड़ें जमाए हुए है। इलाज और जागरूकता के बजाय लोग तांत्रिकों और झाड़-फूंक जैसे तरीकों पर भरोसा करते हैं, जिसका परिणाम कई बार बेहद खतरनाक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता की कमी ऐसे मामलों को बढ़ावा देती है।
मासूम की मौत ने उठाए कई सवाल
इस घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है –
क्या आज भी अंधविश्वास इंसानियत पर भारी है?
क्या जागरूकता की कमी ऐसी घटनाओं की वजह बन रही है?
और आखिर कब खत्म होगा यह खौफनाक सिलसिला?
निष्कर्ष
हजारीबाग की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के उस काले सच को उजागर करती है, जहां अंधविश्वास इंसान को इतना अंधा बना देता है कि वह अपने ही खून का रिश्ता खत्म करने से भी नहीं हिचकता। यह मामला चेतावनी है कि समय रहते अंधविश्वास के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं आगे भी सामने आती रहेंगी।






