होटल-ढाबा मालिकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने खोला राहत का पिटारा, अब नहीं बुझेगी चूल्हे की लौ
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आहट और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है, जिसने देश के लाखों रेस्तरां, ढाबा और कैंटीन संचालकों के चेहरे पर खुशी की लहर ला दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, वाणिज्यिक (Commercial) एलपीजी गैस के आवंटन में 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद अब कुल आवंटन बढ़कर 50 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर खाद्य उद्योग और उससे जुड़े रोजगारों को संजीवनी प्रदान करेगा।
संकट के बाद समाधान की ओर बढ़ते कदम
पिछले कुछ समय से वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के कारण भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी। घरेलू रसोई (Domestic LPG) में गैस की कमी न हो, इसे प्राथमिकता देते हुए सरकार ने शुरुआती दौर में होटल और रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों की आपूर्ति में कटौती की थी। हालांकि, अब स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। घरेलू उत्पादन में आई स्थिरता और रिफाइनरियों के पूरी क्षमता से कार्य करने के चलते सरकार ने इस आवंटन को बहाल करने का निर्णय लिया है। पहले आपूर्ति में 20 प्रतिशत की बहाली की गई थी और अब अतिरिक्त 20 प्रतिशत की वृद्धि ने व्यापारियों को बड़ी राहत दी है।
किसे और कैसे मिलेगा इस राहत का लाभ?
सरकार की इस घोषणा का सीधा लाभ केवल बड़े होटलों को ही नहीं, बल्कि सड़क किनारे चलने वाले ढाबों, कार्यालयों की कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों (Food Processing Units), सामुदायिक रसोई और रियायती दरों पर भोजन देने वाली दुकानों को मिलेगा। पेट्रोलियम सचिव द्वारा राज्यों को लिखे गए पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि यह अतिरिक्त गैस उन प्रतिष्ठानों को मिलेगी जो तेल कंपनियों के साथ पंजीकृत हैं। इसके साथ ही, सरकार ने एक दूरगामी शर्त भी रखी है—वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को अब पाइपलाइन नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। यह कदम भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मजदूरों और प्रवासियों के लिए भी बड़ी सौगात
इस नीतिगत बदलाव में केवल व्यापारियों का ही ध्यान नहीं रखा गया है, बल्कि समाज के निचले तबके और प्रवासी श्रमिकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह कदम उन श्रमिकों के लिए वरदान साबित होगा जो काम के सिलसिले में एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं और जिनके पास बड़े सिलेंडर रखने की सुविधा या संसाधन नहीं होते।
घरेलू गैस की स्थिति और बाजार का हाल
आम उपभोक्ताओं के मन में उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू एलपीजी (Domestic LPG) की आपूर्ति पूरी तरह से स्थिर है। देशभर के वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वितरण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। पिछले कुछ दिनों में देखी गई ‘पैनिक बुकिंग’ (घबराहट में की गई बुकिंग) में भी अब गिरावट आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैस एजेंसियों पर भीड़ लगाने के बजाय होम डिलीवरी सेवाओं पर भरोसा करें।
रिफाइनरियां फुल लोड पर, ईंधन की कोई कमी नहीं
देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियां वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता और पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ काम कर रही हैं। इससे न केवल गैस, बल्कि पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र को भी उनकी सामान्य आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हो रहा है। सरकार अब शहरी गैस वितरण नेटवर्क (CGD) को मजबूत करने के लिए राज्यों से मंजूरी प्रक्रियाओं में तेजी लाने का आग्रह कर रही है ताकि पाइपलाइन के जरिए गैस हर घर और हर चूल्हे तक आसानी से पहुंच सके। संक्षेप में कहें तो, सरकार का यह फैसला न केवल खाद्य व्यवसाय को मजबूती देगा, बल्कि त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन से पहले बाजार में एक सकारात्मक माहौल भी तैयार करेगा। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें इस आवंटन को धरातल पर कितनी तेजी से लागू करती हैं।






