सुक्खू सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’: क्या हिमाचल के चौथे बजट में खुलेगा राहतों का पिटारा या बढ़ेगा जनता पर बोझ
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संवाद 24 हिमाचल प्रदेश । राजनीति और आर्थिकी के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज अपनी सरकार का चौथा बजट विधानसभा में पेश करने जा रहे हैं। राज्य के वित्तीय संकट और बढ़ते कर्ज के बीच पेश होने वाले इस बजट पर न केवल सत्तापक्ष और विपक्ष, बल्कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, बागवानों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं। यह बजट सुक्खू सरकार के लिए एक अग्निपरीक्षा की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि एक तरफ चुनावी वादों को पूरा करने का दबाव है और दूसरी तरफ राज्य की खाली होती तिजोरी।
आम जनता को राहत या नई चुनौतियों का सामना?
शिमला के तपोवन में विधानसभा सत्र के दौरान जब मुख्यमंत्री बजट भाषण पढ़ेंगे, तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या सरकार महंगाई से जूझ रही जनता को कोई सीधी राहत देगी? सूत्रों की मानें तो इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘हिम गंगा’ जैसी योजनाओं के विस्तार और दूध खरीद की कीमतों में वृद्धि पर बड़ा एलान हो सकता है। इसके अलावा, पर्यटन प्रदेश होने के नाते साहसिक खेलों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष बजट आवंटित किए जाने की प्रबल संभावना है। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ आगे बढ़ रही है, जिसका प्रतिबिंब इस बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें
हिमाचल प्रदेश को ‘कर्मचारियों का प्रदेश’ कहा जाता है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) लागू करने के बाद अब कर्मचारियों की नजरें एरियर और महंगाई भत्ते (DA) की किस्तों पर हैं। बजट में इन वित्तीय देनदारियों को लेकर क्या रोडमैप तैयार किया गया है, यह देखना दिलचस्प होगा। प्रदेश के हजारों आउटसोर्स कर्मचारी भी लंबे समय से एक स्थायी नीति की मांग कर रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री इस बजट में उनके लिए कोई ठोस नीति का पिटारा खोलेंगे? यदि ऐसा होता है, तो यह आगामी चुनावों के लिहाज से सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है।
बागवानी और कृषि: हिमाचल की रीढ़
हिमाचल की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सेब और अन्य फलों के उत्पादन पर निर्भर है। बागवानों को उम्मीद है कि एंटी-हेल गन, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी में बढ़ोतरी की जाएगी। बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए नई गौशालाओं के निर्माण के लिए भी विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू का ध्यान पिछले कुछ समय से सौर ऊर्जा और ग्रीन हिमाचल की ओर रहा है, ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर बड़े निवेश के प्रस्ताव बजट का हिस्सा हो सकते हैं।
विपक्ष का हमला और वित्तीय प्रबंधन
दूसरी ओर, विपक्ष लगातार सरकार को कर्ज के मुद्दे पर घेर रहा है। हिमाचल पर बढ़ता कर्ज का बोझ सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे केंद्र से मिलने वाली सहायता और राज्य के अपने संसाधनों के बीच कैसे संतुलन बैठाते हैं। आज का बजट भाषण इन सभी आरोपों का जवाब देने का एक जरिया भी बनेगा।






