हरियाणा में हाई-वोल्टेज ड्रामा: राज्यसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच खिंची तलवारें, जानें कैसे ‘किस्मत’ ने पलटा खेल
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संवाद 24 हरियाणा। राजनीति में सोमवार का दिन किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं रहा। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में घंटों चले खींचतान, शिकायतों और नाटकीय घटनाक्रम के बाद आखिरकार परिणाम घोषित हुए। इस चुनावी रण में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत का परचम लहराया। जहां भाजपा के लिए यह जीत पहले से तय मानी जा रही थी, वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी ‘अग्निपरीक्षा’ से कम नहीं था, जिसमें उन्होंने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को मात देकर अपनी साख बचा ली।
देर रात तक चला शिकायतों का दौर: कैसे फंसा पेंच?
मतदान खत्म होने के बाद वोटों की गिनती रात 11 बजे शुरू होनी थी, लेकिन भाजपा और कांग्रेस की ओर से एक-दूसरे के वोटों पर जताई गई आपत्तियों ने चुनाव आयोग के दफ्तर में हलचल मचा दी। कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट को रद्द करने की मांग की, तो वहीं भाजपा ने कांग्रेस के दो विधायकों—भरत सिंह बेनीवाल और परमवीर सिंह—के वोट पर सवाल उठाए। मामला दिल्ली तक पहुंचा और घंटों के विचार-विमर्श के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने अनिल विज और भरत सिंह बेनीवाल के वोट को सही माना, लेकिन परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया। इसी पेचीदगी के कारण वोटों की गिनती रात सवा बजे तक खिंच गई।
संजय भाटिया की आसान जीत, कर्मवीर बौद्ध की मशक्कत
90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में जीत के लिए जादुई आंकड़े के साथ भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया को 33 मत मिले, जबकि उन्हें मात्र 31 वोटों की दरकार थी। भाजपा ने अपनी रणनीति को इतना पुख्ता रखा था कि किसी भी वोट के रद्द होने की स्थिति में उनकी जीत पर कोई आंच न आए। दूसरी ओर, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की राह कांटों भरी थी। उन्हें 28 वोट मिले, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल 25 वोटों पर सिमट गए। मात्र 3 वोटों के अंतर ने कर्मवीर बौद्ध को राज्यसभा की दहलीज तक पहुंचाया। भले ही सतीश नांदल चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने अंत तक कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी।
किस्मत के धनी रहे बौद्ध, हुड्डा का बढ़ा कद
राजनीतिक गलियारों में कर्मवीर बौद्ध को ‘किस्मत का धनी’ कहा जा रहा है। राहुल गांधी के पसंदीदा उम्मीदवार होने के बावजूद पार्टी के भीतर ही कई विधायक उनके नाम पर एकमत नहीं थे। इसके बावजूद, क्रॉस वोटिंग की खबरों के बीच बौद्ध की जीत ने हरियाणा कांग्रेस, और विशेष रूप से विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव को फिर से स्थापित कर दिया है। पिछले दो राज्यसभा चुनावों में हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस के लिए यह जीत एक मरहम की तरह है, जिसने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है।
किसने किसको दिया वोट: आंकड़ों का गणित
विधानसभा में कुल 88 वोट पड़े। इनेलो के अर्जुन सिंह चौटाला और आदित्य देवीलाल चौटाला ने मतदान प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले वोट डाला, जबकि विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण, जो हरिद्वार गए हुए थे, उन्होंने सबसे अंत में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव के आंकड़ों को देखें तो भाजपा के 33, कांग्रेस के 28 और निर्दलीय के 25 वोटों ने इस चुनाव को बेहद रोचक बना दिया। कांग्रेस की एक वोट रद्द हुई और दो कैंसिल हुई, जबकि 6 वोट क्रॉस होने की सूचना है।
हैट्रिक से चूकी भाजपा, कांग्रेस का कलंक धुला
इस परिणाम के साथ ही भाजपा हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गई। वह निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के जरिए विपक्ष को चारों खाने चित करने की तैयारी में थी, लेकिन कांग्रेस ने इस बार अपनी एकजुटता (भले ही कागजों पर ही सही) दिखाकर बाजी मार ली। रात करीब सवा बजे जब जीत की मुहर लगी, तो दोनों ही खेमों में हलचल तेज थी। हालांकि, औपचारिक घोषणा होने तक सस्पेंस बरकरार रहा।






