गैस संकट का असर: दिल्ली के मशहूर ‘सीताराम छोले-भटूरे’ की दुकानें बंद, स्ट्रीट फूड कारोबार पर मंडराया खतरा
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत अब आम लोगों के खाने-पीने के कारोबार पर भी भारी पड़ने लगी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि चांदनी चौक की प्रसिद्ध और लगभग 50 साल पुरानी ‘सीताराम छोले-भटूरे’ की सभी शाखाओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। गैस की आपूर्ति बाधित होने से कई रेस्टोरेंट, ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता अपने किचन चलाने में असमर्थ हो रहे हैं, जिससे दिल्ली की मशहूर स्ट्रीट फूड संस्कृति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
गैस की किल्लत से बंद हुई मशहूर दुकानें
दिल्ली के चांदनी चौक में दशकों से स्वाद के लिए प्रसिद्ध सीताराम छोले-भटूरे की दुकान राजधानी के लोगों और पर्यटकों के बीच खास पहचान रखती है। लेकिन एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी के कारण इस प्रतिष्ठान की सभी सात शाखाओं को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। दुकान संचालकों का कहना है कि रसोई गैस के बिना किचन चलाना असंभव है और लगातार कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से कामकाज ठप हो गया है। यह स्थिति सिर्फ एक दुकान तक सीमित नहीं है। राजधानी के कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। गैस की कमी के कारण कई प्रतिष्ठानों ने या तो अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है या फिर अस्थायी रूप से दुकानें बंद करनी पड़ी हैं।
मेन्यू से गायब हो रहे लोकप्रिय व्यंजन
गैस संकट का असर सीधे ग्राहकों की थाली तक पहुँच रहा है। पहले जहां रेस्टोरेंट और ढाबों में दर्जनों व्यंजन उपलब्ध होते थे, अब कई जगहों पर केवल सीमित भोजन ही परोसा जा रहा है। कुछ स्थानों पर सिर्फ राजमा-चावल, कढ़ी-चावल या दाल-चावल जैसे सरल व्यंजन ही बनाए जा रहे हैं क्योंकि इनको तैयार करने में अपेक्षाकृत कम गैस लगती है। स्ट्रीट फूड विक्रेताओं का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो दिल्ली की पहचान बन चुके कई लोकप्रिय व्यंजन कुछ समय के लिए पूरी तरह गायब हो सकते हैं।
ब्लैक मार्केट में बढ़ी गैस की कीमत
गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ जगहों पर सिलेंडर की कालाबाजारी भी बढ़ने लगी है। व्यापारियों का आरोप है कि जहां सामान्य कीमत पर सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है, वहीं ब्लैक मार्केट में वही सिलेंडर कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक कई विक्रेताओं को सिलेंडर 3000 से 5000 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनका खर्च और बढ़ गया है। इस वजह से छोटे दुकानदारों और ठेले-रेहड़ी वालों की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो रही है, क्योंकि उनके पास महंगे सिलेंडर खरीदने की क्षमता नहीं है।
गैस संकट की वजह क्या है
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात भी एक बड़ी वजह हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों में देखने को मिल रहा है। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई घटने से सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार पर पड़ा है, क्योंकि ये पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर रहते हैं।
छोटे कारोबारियों के सामने रोज़गार का संकट
दिल्ली की गलियों में हजारों लोग चाय, समोसा, छोले-भटूरे, पूड़ी-सब्जी और अन्य स्ट्रीट फूड बेचकर अपना गुजारा करते हैं। लेकिन गैस की कमी ने उनके सामने रोज़गार का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों का कहना है कि अगर कुछ दिनों तक भी गैस नहीं मिली तो उन्हें दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं। यह स्थिति सिर्फ व्यापारियों के लिए ही नहीं बल्कि उन हजारों कर्मचारियों के लिए भी चिंता का विषय है जो इन दुकानों और रेस्टोरेंट में काम करते हैं।
सरकार से समाधान की उम्मीद
व्यापारी संगठनों और रेस्टोरेंट मालिकों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि कारोबार सामान्य हो सके। हालांकि राहत की बात यह है कि दिल्ली में कुछ बड़े सामुदायिक भोजन कार्यक्रम, जैसे कि सरकारी कैंटीन या स्कूलों के मिड-डे मील कार्यक्रम, फिलहाल प्रभावित नहीं हुए हैं और उनके लिए गैस की आपूर्ति जारी है।
राजधानी की फूड संस्कृति पर संकट
दिल्ली को उसकी विविध और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड संस्कृति के लिए जाना जाता है। चांदनी चौक से लेकर कनॉट प्लेस और पहाड़गंज तक हजारों खाने-पीने की दुकानें शहर की पहचान बन चुकी हैं। लेकिन मौजूदा गैस संकट ने इस संस्कृति पर भी खतरे की घंटी बजा दी है। यदि जल्द ही गैस की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो राजधानी के कई प्रसिद्ध व्यंजन और दुकानें कुछ समय के लिए लोगों की पहुंच से दूर हो सकती हैं।






