ऊर्जा संकट से लड़ने को भारत तैयार: केरोसिन की वापसी और कोयले पर जोर
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए कमर कस ली है। फारस की खाड़ी में मचे घमासान और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के लगभग बंद होने से भारत की तेल और गैस आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर कदम उठाते हुए देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों का ऐलान किया है, ताकि आम जनता को ईंधन की किल्लत का सामना न करना पड़े।
केरोसिन की ऐतिहासिक वापसी: पुरानी व्यवस्था फिर लागू
पिछले एक दशक से भारत सरकार देश को केरोसिन मुक्त बनाने के मिशन पर काम कर रही थी, लेकिन वर्तमान वैश्विक संकट को देखते हुए अस्थायी रूप से केरोसिन के उपयोग को फिर से शुरू करने का फैसला किया गया है। राज्यों को उनके नियमित कोटे के अलावा 48 हजार किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया गया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए संजीवनी की तरह है जिन्हें रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति में बाधा के कारण खाना पकाने में कठिनाई हो रही थी।
होटलों और रेस्तरां के लिए कोयले की अनुमति
पर्यावरण नियमों में ढील देते हुए सरकार ने एक महीने के लिए होटलों और रेस्तरां को वैकल्पिक ईंधन के रूप में कोयले और बायोमास का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। यह कदम एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है। इससे कमर्शियल गैस की मांग में कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा और रसोई गैस की किल्लत कम होगी।
रसोई गैस बुकिंग पर नई पाबंदी: ‘पैनिक’ रोकने की कोशिश
देश में रसोई गैस की भारी कमी न हो, इसके लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों को सख्त कर दिया है। अब शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर 25 दिन बाद और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर ही बुक किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि लोग डर (Panic Booking) के मारे समय से पहले गैस बुक कर रहे हैं। इस कदम से जमाखोरी और अवैध बिक्री पर भी लगाम लगेगी।
सप्लाई चेन का विस्तार: 27 से बढ़कर 40 देशों तक पहुंच
भारत ने कच्चे तेल के लिए अपनी निर्भरता केवल खाड़ी देशों पर सीमित नहीं रखी है। भारत अब 27 के बजाय लगभग 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है। रूस, अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। सरकार का दावा है कि रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, इसलिए देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
घरेलू उत्पादन में भारी बढ़ोतरी
आयात पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आवश्यक क्षेत्रों जैसे अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दें। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अस्थायी कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि केरोसिन और कोयले का उपयोग पर्यावरण के लिहाज से स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन युद्ध जैसे हालात में यह देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। सरकार लगातार वैकल्पिक आयात मार्गों की तलाश कर रही है ताकि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचता है, तो भी भारत की विकास की गति न रुके।






