मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग, भारत में मचने लगी हाहाकार! पुणे में श्मशान तो बेंगलुरु में होटल बंद
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संवाद 24 डेस्क। सात समंदर पार मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के देशों में भड़की युद्ध की चिंगारी अब भारतीय रसोई और व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक पहुँच गई है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह चरमरा गई है, जिसका सबसे भयावह असर भारत में तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस की कमी के रूप में देखा जा रहा है।
बेंगलुरु: स्वाद के शहर में छाया सन्नाटा
कर्नाटक की राजधानी और भारत के ‘टेक हब’ बेंगलुरु में गैस की भारी किल्लत ने फूड इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है। शहर के होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स ने अपने ग्राहकों को सीमित मेन्यू देना शुरू कर दिया है या अनिश्चितकाल के लिए ताले लगा दिए हैं। छोटे ढाबे और कैंटीन चलाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
पुणे: अंतिम विदाई पर भी संकट का साया
महाराष्ट्र के पुणे से आई तस्वीरें सिस्टम की लाचारी बयां कर रही हैं। शहर के गैस आधारित श्मशान घाटों (Gas Crematoriums) को गैस आपूर्ति ठप होने के कारण बंद करना पड़ा है। इसके चलते लोगों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है या फिर लंबी दूरी तय कर पारंपरिक लकड़ी आधारित श्मशान घाटों की ओर रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि गैस की प्राथमिकता अब घरों की ओर मोड़ दी गई है, जिससे सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ा है।
आखिर क्यों पैदा हुई यह किल्लत?
भारत अपनी गैस और तेल की जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। वर्तमान युद्ध के कारण लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। कई जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है, जिससे माल पहुँचने में देरी हो रही है और लागत भी कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर गैस की जमाखोरी शुरू होने से भी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।
सरकार की तैयारी और चुनौती
भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम मंत्रालय अन्य वैकल्पिक देशों से गैस आयात करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, लेकिन तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचा, तो गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा।






