रूसी तेल पर अमेरिका की ‘छूट’ से भारत की राजनीति गरम: अमेरिकी अधिकारी के बयान पर कांग्रेस का हमला

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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीति गरमा गई है। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने भारत को रूसी तेल खरीदने के मामले में “अच्छा एक्टर” बताया है। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी है। वहीं इस पूरे मामले को लेकर भारत में विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

अमेरिका ने दी 30 दिन की अस्थायी छूट
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट (waiver) दी है। यह छूट खास तौर पर उन तेल खेपों के लिए है जो पहले से समुद्र में फंसी हुई थीं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना है ताकि बाजार में अचानक संकट पैदा न हो। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह एक अल्पकालिक व्यवस्था है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा। उनका तर्क है कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता न बढ़े।

भारत को बताया “अच्छा एक्टर”
इसी संदर्भ में बेसेंट ने भारत के रुख की चर्चा करते हुए कहा कि भारत ने पहले रूस से तेल खरीद को लेकर बातचीत में सहयोग दिखाया था। इसी वजह से उन्होंने भारत को इस मामले में “अच्छा एक्टर” बताया। हालांकि यह बयान पूरी तरह सकारात्मक नहीं माना जा रहा, क्योंकि इससे पहले भी अमेरिकी अधिकारियों ने भारत द्वारा रूस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर चिंता जताई थी।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर भारत को तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति या छूट लेनी पड़ रही है तो यह देश की संप्रभुता से जुड़ा सवाल है। कांग्रेस नेताओं ने पूछा कि क्या भारत जैसे बड़े देश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी अन्य देश की अनुमति की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है। कुछ नेताओं ने इसे भारत की विदेश नीति से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि सरकार को संसद और जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सरकार का पक्ष: ऊर्जा सुरक्षा सबसे जरूरी
दूसरी ओर सरकार के समर्थक इस फैसले को ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा व्यावहारिक कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने पड़ते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भारत लंबे समय से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचता भी रहा है, जिससे देश की ऊर्जा लागत कम रखने में मदद मिलती है।

वैश्विक संकट से जुड़ा है मामला
यह पूरा मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव और समुद्री मार्गों में अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। इसी कारण अमेरिका ने कुछ मामलों में प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है ताकि तेल आपूर्ति बाधित न हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक तेल आपूर्ति अचानक कम हो जाती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी नजर
इस घटनाक्रम को भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, लेकिन रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दे समय-समय पर विवाद का कारण बनते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और अमेरिका की आगे की नीति से स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल इतना तय है कि यह मामला केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू राजनीति तीनों का असर दिखाई दे रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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