पालघर में मौत का साया: ओलेम गैस लीक से मची भारी तबाही, 2000 लोगों को रातों-रात छोड़ना पड़ा अपना घर!
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संवाद 24 महाराष्ट्र । पालघर जिले से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक केमिकल फैक्ट्री से हुए भीषण गैस रिसाव ने हजारों जिंदगियों को खतरे में डाल दिया। पालघर के बोइसर औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) में स्थित एक रासायनिक इकाई से ‘ओलेम गैस’ (Oleum Gas) के रिसाव के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए रातों-रात करीब 2000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है, लेकिन हवा में घुले इस ज़हर ने इलाके के लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी है।
आधी रात को शुरू हुआ मौत का तांडव
घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है। जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया था, तभी बोइसर MIDC स्थित एक केमिकल कंपनी के स्टोरेज टैंक से ओलेम गैस का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते गैस का सफ़ेद धुंध जैसा गुबार पास की बस्तियों में फैलने लगा। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अचानक आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। कई लोग खांसी और बेचैनी के कारण नींद से जाग गए और जब उन्होंने खिड़की से बाहर देखा, तो चारों ओर सफ़ेद धुंध छाई हुई थी।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: खाली कराए गए गांव
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, दमकल विभाग और पुलिस बल मौके पर पहुँच गया। गैस की गंभीरता को देखते हुए तुरंत प्रभावित इलाके की घेराबंदी की गई। प्रशासन ने माइक के जरिए मुनादी करवाकर लोगों को घरों से बाहर निकलने और सुरक्षित दूर जाने का निर्देश दिया। खैपाड़ा और उसके आसपास के करीब 2000 ग्रामीणों को बसों और निजी वाहनों के जरिए सुरक्षित स्थानों, स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में शिफ्ट किया गया। स्थिति इतनी गंभीर थी कि NDRF की टीम को भी स्टैंडबाय पर रखा गया।
क्या है ओलेम गैस और कितनी खतरनाक है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ओलेम (fuming sulfuric acid) एक बेहद खतरनाक रसायन है। जब यह हवा के संपर्क में आती है, तो सल्फ्यूरिक एसिड का घना कोहरा बनाती है। इसके संपर्क में आने से फेफड़ों में गंभीर सूजन, आंखों की रोशनी जाना और त्वचा का बुरी तरह जलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि रिसाव पर समय रहते काबू न पाया जाता, तो यह ‘भोपाल गैस त्रासदी’ जैसा भीषण रूप ले सकता था।
दमकल विभाग की कड़ी मशक्कत
फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि रिसाव को रोकने के लिए वाटर कर्टन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया गया ताकि गैस हवा में ज्यादा ऊपर न फैल सके। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद तकनीकी टीम ने टैंक के वॉल्व को बंद करने में सफलता पाई। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इलाके में हल्का धुआं मौजूद था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें हवा की गुणवत्ता (Air Quality) की जांच कर रही हैं।
फैक्ट्री मालिक पर गिरेगी गाज?
पालघर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने घटना स्थल का जायजा लिया है। प्राथमिक जांच में फैक्ट्री प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अक्सर अनदेखी की जाती है। प्रशासन ने फैक्ट्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और गहन जांच के आदेश दिए हैं। औद्योगिक सुरक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय (DISH) भी इस बात की जांच कर रहा है कि गैस रिसाव के समय सुरक्षा अलार्म क्यों नहीं बजा।
जनजीवन अस्त-व्यस्त
इस हादसे के कारण पालघर-बोइसर मार्ग पर यातायात को कुछ समय के लिए रोक दिया गया। आसपास के कारखानों में काम करने वाले मजदूरों को भी हटा दिया गया है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन विस्थापित हुए लोग अभी भी अपने घरों को लौटने से डर रहे हैं। पालघर का यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।






