आसमान में भारत का अभेद्य कवच: रूस से आ रहे हैं 5 नए S-400 स्क्वाड्रन, अब परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर!
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक नए और स्वर्णिम युग की शुरुआत होने जा रही है। भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने और दुश्मनों के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत ने रूस के साथ 5 नए S-400 ‘ट्रायम्फ’ (Triumf) मिसाइल स्क्वाड्रन खरीदने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यह कदम न केवल भारतीय वायु सेना (IAF) की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की ओर से मिलने वाली हवाई चुनौतियों को भी पूरी तरह खत्म कर देगा।
दुश्मन की नींद उड़ाने वाला ‘साइलेंट किलर’
S-400 को दुनिया की सबसे उन्नत और घातक वायु रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रेंज है। यह 400 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमानों, जासूसी ड्रोनों, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही ढेर कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन के आने के बाद भारत का हवाई क्षेत्र एक ऐसा सुरक्षित दुर्ग बन जाएगा, जिसे भेदना किसी भी आधुनिक वायुसेना के लिए लगभग नामुमकिन होगा।
क्या है इस नई डील की खासियत?
भारत पहले ही रूस के साथ 5 स्क्वाड्रनों का समझौता कर चुका है, जिनकी डिलीवरी जारी है। लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों और एलएसी (LAC) पर चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 5 और उन्नत स्क्वाड्रनों की आवश्यकता महसूस की है। सूत्रों के अनुसार, इन नए स्क्वाड्रनों में रूस के अत्याधुनिक अपग्रेड्स भी शामिल होंगे, जो इसे पहले से कहीं अधिक सटीक और घातक बनाएंगे। यह डील अरबों डॉलर की होने की संभावना है, जो भारत और रूस के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
चीन और पाकिस्तान की हर चाल होगी नाकाम
S-400 की तैनाती मुख्य रूप से भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर की जाएगी। इसकी रडार प्रणाली इतनी शक्तिशाली है कि यह पाकिस्तान के अंदर गहराई तक और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में उड़ने वाले किसी भी संदिग्ध विमान की जानकारी भारत को तुरंत दे देगी। यह सिस्टम ‘स्टील्थ’ तकनीक (रडार से बचने वाली तकनीक) वाले विमानों को भी पकड़ने में सक्षम है। ऐसे में चीन के J-20 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का खतरा भी अब भारत के लिए बेअसर हो जाएगा।
अमेरिका की आपत्ति के बावजूद भारत का कड़ा फैसला
रूस से S-400 खरीदने के भारत के फैसले पर अमेरिका लंबे समय से ‘काटसा’ (CAATSA) कानून के तहत प्रतिबंधों की चेतावनी देता रहा है। हालांकि, भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी रक्षा जरूरतें उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का आंतरिक मामला है और वह किसी भी दबाव में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। रूस के साथ यह नई डील भारत की उस स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है, जहाँ राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम
भले ही यह प्रणाली रूस से खरीदी जा रही है, लेकिन भारत इसके मेंटेनेंस और भविष्य के तकनीकी सहयोग के लिए स्वदेशी बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। भारतीय इंजीनियरों और वायु सेना के विशेषज्ञों को रूस में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले समय में भारत इन प्रणालियों के कुछ महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण देश में ही करने की योजना बना रहा है, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बल देगा।






