मार्क कार्नी की भारत यात्रा, दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाला दौरा
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी से 2 मार्च 2026 तक भारत की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा के बीच पिछले कुछ वर्षों से तनावग्रस्त रिश्तों को सामान्य करना और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है। यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को फिर से पेटी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस यात्रा की शुरुआत मुंबई से हुई, जहां कार्नी ने स्थानीय उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसके बाद वह नई दिल्ली पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उच्च स्तरीय वार्ता और प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय बैठकें निर्धारित हैं। कार्नी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कनाडा-अमेरिका संबंधों में अनिश्चितता और तनाव के बीच ओटावा खुद को अमेरिका पर निर्भरता कम करके रिश्तों का विस्तार करने पर जोर दे रहा है। भारत को अपने रणनीतिक व्यापार और निवेश साझेदार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे दोनों देशों का आर्थिक फोकस और व्यापक होता दिख रहा है।
तनाव के बाद विश्वास बनाना
भारत और कनाडा के बीच राजनयिक दरार पिछले कुछ वर्षों में गहरी हो गई थी, खासकर 2023 में कनाडा के खालिस्तानी सक्रियता और हत्या के आरोपों के बाद। दोनों देशों ने राजनयिक स्तर पर कदम पीछे खींचे, और कई वार्ता रद्द हो गईं। मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ओटावा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह पहले की तुलना में अधिक व्यावसायिक और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाएगा, जिसमें कूटनीति को घरेलू राजनीति से अलग रखकर आर्थिक सहयोग, आपूर्ति-शृंखला और वैश्विक रणनीति जैसे ठोस विषयों पर फोकस होगा। इसलिए इस दौरे को केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि पिछले तनाव को पीछे छोड़ भरोसे का निर्माण करने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा
कार्नी की यात्रा का सबसे बड़ा एजेंडा है दोनों देशों के व्यापार और आर्थिक सहयोग को पुनर्जीवित करना। भारत-कनाडा व्यापार पर कई विशेषज्ञ पहले ही इस दौरे को व्यापारिक अवसरों को खोलने का बड़ा मौका बता चुके हैं। दोनों सरकारें CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) जैसे मुक्त-व्यापार समझौतों को फिर से गति देने पर काम कर रही हैं, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 70 अरब डॉलर तक ले जाना है। इसके अलावा ऊर्जा, तकनीक, AI, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इस दौरे के दौरान भारत-कनाडा CEOs फोरम में उद्योग जगत की भागीदारी भी रही, जिससे व्यापार-सम्बंधित व्यवहारिक समझ तैयार होने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर आगे की सोच
व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा भी इस बातचीत के एजेंडा का एक महत्वपूर्ण भाग है। कनाडा की यूरेनियम आपूर्ति भारत के महत्त्वपूर्ण ऊर्जा सहयोग संबंधों में शामिल है, और इसके बारे में भी उच्च-स्तरीय बातचीत की संभावना है। यह साझेदारी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकती है और दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक फायदे पैदा कर सकती है। इसी तरह रणनीतिक मुद्दों जैसे वैश्विक आपूर्ति-शृंखलाओं की लचीलापन, स्वच्छ ऊर्जा मिशन और Indo-Pacific में सहयोग जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में हैं।
वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और भविष्य
भारत-कनाडा का यह रिश्ते का रीसेट सिर्फ द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बीच महत्व रखता है। दोनों देश अब ऐसे समय में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। यह दौरा भारत के लिए भी फायदा-मूलक है क्योंकि यह ऊर्जा, तकनीक, निवेश और रणनीति जैसे कई क्षेत्रों को एक स्थिर और भरोसेमंद ढांचे के तहत आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। भरोसे और भविष्य-उन्मुख सहयोग की नींव इस यात्रा के दौरान रखे जाने की उम्मीद है।






