खाड़ी में 90 लाख भारतीयों का भविष्य अब नई चुनौतियों के बीच

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संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व के हालात एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहाँ रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। इन लाखों नागरिकों में कामगार, छात्र, व्यवसायी और उनके परिवार शामिल हैं, जो खाड़ी के विभिन्न देशों में रहते और काम करते हैं। हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और अस्थिर हो गई है, जिससे भारत को अपने मूल नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष रणनीतियाँ अपनानी पड़ रही हैं।

खाड़ी में भारतीयों का बड़ा समुदाय और सुरक्षा का मसला
खाड़ी देशों में भारतीयों का योगदान आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, क़तर, ओमान और बहरीन जैसे देशों में भारतीय समुदाय की संख्या 90 लाख के करीब है। इतना बड़ा समुदाय न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि भारत की गल्फ नीति और विस्तारवादी विदेश नीति के लिये भी अहम है। हाल के महीनों में इन देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग में वृद्धि देखने को मिली है, लेकिन मौजूदा तनाव इस रिश्ते को एक नई चुनौती दे रहा है। इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर अपनी प्राथमिकता ज़ाहिर करते हुए, भारत ने अपनी दूतावासों और कांसुलेट्स को नागरिकों को सलाह देने के निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिये संबंधित हेल्पलाइन नंबरों से संपर्क करें।

भारत की त्वरित बचाव योजनाएं और सतर्कता
भारत के विदेश मंत्रालय और विदेश विभाग (MEA) ने खाड़ी में बसे भारतीय समुदाय के लिये कई कदम उठाए हैं जिसमें आवश्यक स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकालने के विकल्प भी तैयार रखे गए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी गंभीर स्थिति में उन्होंने वायु या समुद्री मार्ग से नागरिकों को निकालने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। भारत की दूतावासें भी लगातार स्थानीय हालात पर निगरानी रख रही हैं और सोशल मीडिया तथा अन्य चैनलों के माध्यम से नागरिकों को अपडेट और आवश्यक सुरक्षा निर्देश साझा कर रही हैं। ऐसे समय में जब खाड़ी के कई देश भी अपने एयरस्पेस को बंद करने या सीमित करने की घोषणा कर रहे हैं, भारतीयों को अपनी यात्रा योजनाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

भारत का संतुलित कूटनीतिक रुख
भारत ने इस पूरे मामले पर अपनी कूटनीतिक भूमिका को संतुलित रखने का प्रयास किया है। वह न केवल घरेलू नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है बल्कि देश की विदेश नीति को भी समझदारी से प्रबंधित करने की कोशिश कर रहा है। भारत ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि संवाद और कूटनीति के रास्ते ही स्थिरता और शांति सुनिश्चित कर सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय ने बार-बार कहा है कि भारत न सिर्फ अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को भी बनाए रखने के लिये सहयोग पर जोर देता है। भारत ने किसी भी भावी संकट के लिये आपातकालीन संपर्क नेटवर्क और निकासी योजनाओं को अपडेट किया है, ताकि यदि स्थिति और बिगड़े तो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

ऐतिहासिक तैयारी: पहले भी उठाये गये कदम
इस तरह के बड़े संकट भारत ने पहले भी देखा है। उदाहरण के लिये 1990 में कुवैत युद्ध के दौरान भारत ने अपनी नागरिकों से भारी संख्या में भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला था, जिसे एयरलिफ्ट ऑफ़ इंडियंस कहा जाता है। उस समय के अनुभव से सरकार को इस तरह के संकट से निपटने के लिये रणनीति तैयार करने में सहायता मिली है। इसी प्रकार, यमन संकट के दौरान भारत ने अपनी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिये ऑपरेशन राहत चलाया था, जिसमें हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया। हाल के संघर्षों में भारत ने अपने अधिकारियों, दूतावासों और नागरिकों के लिये संपर्क सूत्रों और बचाव योजनाओं को भी सुनिश्चित किया है ताकि कोई भी अप्रत्याशित स्थिति में सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया शुरु की जा सके।

व्यापक प्रभाव: आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य
खाड़ी में रहने वाले भारतीय केवल मज़दूर ही नहीं हैं, बल्कि अनेक उच्च दक्षता वाले पेशेवर, व्यवसायी, छात्र और छोटे-बड़े उद्यमी भी शामिल हैं। इन लोगों का खाड़ी देशों की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था को खाड़ी से ऊर्जा सुरक्षा, निर्यात और निवेश का बड़ा लाभ मिलता है, इसलिए इस क्षेत्र को स्थिर बनाये रखना भी राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण है। स्थितियों में खातिरदारी बरतते हुए, भारत ने कारोबारियों और संगठनों से भी संपर्क में रहने के लिये कहा है ताकि उनकी सुरक्षा और हित सुनिश्चित हो सके।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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