दहेज विवाद का नया पहलू: हिसार में पति ने पत्नी को ‘बहन’ कहना शुरू किया, मामला दर्ज
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संवाद 24 हरियाणा। हिसार जिले से एक अनोखी और चिंताजनक दहेज-उत्पीड़न की घटना सामने आई है, जिसमें एक पति ने अपनी पत्नी को “बहन” कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया क्योंकि वो उसकी दहेज मांगों को पूरा नहीं कर पा रही थीं। इस व्यवहार को लेकर महिला ने पुलिस में दहेज उत्पीड़न (498A) का केस दर्ज कराया है, जो सामाजिक रूप से गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
शादी के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुई असहमति
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार मामला मार्च 2025 में हुई शादी से शुरू हुआ। शादी के कुछ ही दिनों बाद महिला के पति ने उसके सामने सॉफ्ट-लड़कियों की मांगें रखना शुरू कर दीं – जिसमें महंगी बाइक जैसे तोहफे और किसी आवश्यक मूल्य की वस्तुओं की मांगें शामिल थीं। जब महिला इन मांगों को पूरा नहीं कर पाई, तो उसके पति ने उसका नाम बदलकर उसे “बहन” कहकर बुलाना शुरू कर दिया – जो एक तरह से पति-पत्नी के बीच दूरी और अवमानना का प्रतीक बन गया।
दहेज की मांग को लेकर महिला ने दर्ज कराई शिकायत
महिला ने साक्ष्य सहित पुलिस को शिकायत दी कि उसके पति ने शादी के तुरंत बाद ही उसे मान-सम्मान का अपमान किया और कथित दहेज की मांगों को लेकर भेदभाव किया। इस शिकायत के आधार पर स्थानीय थाना पुलिस ने आईपीसी की 498A और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस तरह के अपमानजनक व्यवहार और दहेज उत्पीड़न के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है, और आगे की कार्रवाई के लिए मामले की फ़ोरेंसिक और गवाहों से बयान लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रदेश में दहेज मामले: एक जटिल सामाजिक परिप्रेक्ष्य
दरअसल, हरियाणा में दहेज के मामलों की लंबी सांस्कृतिक और कानूनी इतिहास रही है। पहले भी हिसार और आसपास के इलाकों से दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट या मानसिक उत्पीड़न जैसे मामलों की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिनमें कभी-कभी दहेज की मांग के कारण गंभीर आरोप दर्ज हुए हैं। इस तरह के मामलों में पुलिस, न्यायपालिका और समाजिक संस्था मिलकर महिला सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई करते हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो दहेज उत्पीड़न के अपराध में आरोपी के खिलाफ कड़ी सजा और जुर्माना का प्रावधान होता है, क्योंकि दहेज लेना और देना दोनों भारतीय कानून के तहत अवैध और अपराध हैं।
क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?
कानून विशेषज्ञ बताते हैं कि दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराना महिला का संवैधानिक अधिकार है, और इस तरह के मामलों की जांच निष्पक्ष और तेज़ी से होनी चाहिए। यदि गिरफ्तारी और साक्ष्य पर्याप्त मिले, तो आरोपी के खिलाफ आपराधिक मुक़दमा चलाया जा सकता है। वे यह भी कहते हैं कि समाज में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके और महिलाओं को घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और बेइज्जती से बचाया जा सके।
समाज पर व्यापक प्रभाव
इस घटना ने हिसार और आसपास के इलाकों में दहेज-संबंधी सामाजिक मान्यताओं पर फिर से बहस छेड़ दी है। मुहल्ले और सामाजिक संगठनों ने कहा है कि दहेज की मांग और उत्पीड़न जैसी प्रथाएँ घरेलू कलह, मानसिक तनाव और सामाजिक विभाजन को जन्म देती हैं। इसके अलावा पीड़ितों और उनके परिवारों पर सामाजिक व आर्थिक दबाव भी बढ़ता है जब पुरुष पक्ष ऐसी मांगों और व्यवहार को जारी रखने की कोशिश करता है।
आगे की ख़बरें और जांच
स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी पति के बयान और गवाहों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच के बाद अदालत में आरोपित के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की जाएगी। इस दौरान समाज और महिला अधिकार संगठनों की निगाहें मामले पर बनी हुई हैं, जिससे यह देखा जाएगा कि क्या इस तरह के दहेज उत्पीड़न के आरोपों से निपटने के लिए न्यायिक प्रक्रिया कितनी प्रभावी साबित होती है।






