आईआईटी डिग्री का गलत इस्तेमाल! गुरुग्राम में साइबर सिंडिकेट का बड़ा खुलासा

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संवाद 24 हरियाणा। साइबर हब कहे जाने वाले गुरुग्राम में एक बार फिर डिजिटल ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। इस बार चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरफ्तार आरोपियों में एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान से पढ़ा युवक भी शामिल है। साइबर पुलिस ने एक आईआईटी स्नातक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो विदेश में बैठे संचालकों के निर्देश पर भारत में ठगी का जाल फैला रहा था। इस खुलासे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उच्च शिक्षा और तकनीकी ज्ञान का गलत इस्तेमाल किस तरह समाज के लिए खतरा बनता जा रहा है।

शिकायत से खुली ठगी की परतें
मामले की शुरुआत एक पीड़ित की शिकायत से हुई, जिसने ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगे जाने की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत में बताया गया कि उसे आकर्षक रिटर्न का झांसा देकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रकम जमा करवाई गई, लेकिन बाद में न तो पैसा वापस मिला और न ही कंपनी से कोई संपर्क हो पाया। साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की तो बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की कड़ियां गुरुग्राम तक पहुंच गईं। यहीं से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

कैसे काम करता था साइबर सिंडिकेट
जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। विदेशी मास्टरमाइंड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइट तैयार करते थे, जबकि भारत में बैठे सदस्य बैंक खाते उपलब्ध कराते और पैसों के लेनदेन को अंजाम देते थे। लोगों को सोशल मीडिया विज्ञापनों, मैसेज और कॉल के माध्यम से ऊंचे मुनाफे का लालच दिया जाता था। एक बार जब व्यक्ति पैसा जमा कर देता, तो उसे कुछ समय तक फर्जी प्रॉफिट दिखाया जाता ताकि उसका भरोसा बना रहे। बाद में अचानक प्लेटफॉर्म बंद कर दिया जाता और रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।

आईआईटी स्नातक की भूमिका पर सवाल
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल आईआईटी स्नातक की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह तकनीकी संरचना तैयार करने और डिजिटल ट्रैकिंग से बचने में मदद करता था। पुलिस का मानना है कि उसकी विशेषज्ञता का उपयोग नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और ट्रेस-प्रूफ बनाने में किया गया। यह तथ्य इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि उच्च शिक्षित युवाओं का इस तरह के अपराधों में शामिल होना समाज के लिए गंभीर संकेत देता है।

बैंक खातों के जरिए होता था खेल
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को कई फर्जी और किराए के बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। इन खातों का उपयोग सिर्फ लेनदेन के लिए किया जाता और कुछ समय बाद बंद कर दिया जाता था। आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच
मामले में विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि सिंडिकेट का संचालन देश के बाहर से हो रहा था और भारत में केवल सहयोगी नेटवर्क काम कर रहा था। इस तरह के मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की भी संभावना रहती है, इसलिए एजेंसियां वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय लिंक की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

बढ़ते साइबर अपराध पर चिंता
गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में हाल के महीनों में साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। निवेश, लोन, ऑनलाइन जॉब और गेमिंग के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन की बढ़ती आदत और तेजी से बढ़ता ऑनलाइन भरोसा अपराधियों के लिए अवसर बन गया है। ऐसे मामलों में आम लोग लालच और जल्द मुनाफे की उम्मीद में फंस जाते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं।

पुलिस की चेतावनी और अपील
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या निवेश प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच अवश्य करें। केवल प्रमाणित और अधिकृत प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें और संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। गुरुग्राम में हुए इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराध अब सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती बन चुका है। सवाल यह है कि क्या हम डिजिटल दुनिया में कदम रखते समय पर्याप्त सावधानी बरत रहे हैं? क्योंकि एक छोटी सी चूक आपकी मेहनत की कमाई को पल भर में गायब कर सकती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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