किसान के बेटे ने खेत में खोई जान – आवारा कुत्तों के झुंड ने 8 साल के मासूम को नोच-नोच कर मौत के घाट उतारा
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संवाद 24 पंजाब। कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना ने ग्रामीण समुदाय को झकझोर दिया है। यहाँ एक आवारा कुत्तों के झुंड ने आठ वर्षीय सूरज (इतवारी) पर हमला कर दिया, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। इलाज के दौरान अस्पताल में उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार और आसपास के लोग गहरा सदमे में हैं। घटना की भयावहता ने स्थानीय प्रशासन और लोगों के बीच आवारा कुत्तों की समस्या पर नई बहस शुरू कर दी है।
खेत में शौच के लिए गया बच्चा, बने हादसे का शिकार
पुलिस और परिजनों के अनुसार, दोपहर के समय सूरज अपने पिता के साथ खेतों में खाना देने गया था। थोड़ी दूरी पर वह शौच करने के लिए गया, तभी 5-6 आवारा कुत्तों का झुंड उस पर टूट पड़ा। कुत्तों ने उस पर बरसते हुए हमला कर दिया और शरीर के कई हिस्सों पर गहरे घाव किए। यह हमला इतना अचानक और तेज था कि बच्चा खुद बचने में असमर्थ रहा।
चीखें गूंजीं, मदद के लिए दौड़े माता-पिता
बच्चे की चीख सुनकर उसकी मां और पिता तुरंत उसकी ओर भागे। उन्होंने कुत्तों को खदेड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक सूरज गंभीर रूप से घायल हो चुका था। परिजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल जालंधर ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी मृत्यु की घोषणा कर दी। मृतक की पहचान इतवारी निवासी गिला गाखला, सुल्तानपुर लोधी के रूप में हुई है।
परिवार मजदूरी करता था खेतों में
परिजनों की जानकारी के अनुसार परिवार मूल रूप से बहराइच (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है, लेकिन फिलहाल कपूरथला में रहकर मजदूरी करता है। पिता खेतों में आलू की बुआई कर रहे थे कि इसी बीच यह दर्दनाक घटना घटी। स्थानीय लोग इस त्रासदी से गहरे सदमे में हैं और उन्होंने प्रशासन से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर सख्त कदम उठाने की मांग की है।
क्षेत्र में कुत्तों की समस्या एक पुराना मुद्दा
यह कोई अकेली घटना नहीं है – देश के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के हमलों की खबरें सामने आती रहती हैं, जिसमें गंभीर घायल और मौतें भी शामिल हैं। आवारा कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरे के रूप में उभर रहे हैं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या रही?
घटना के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने कहा है कि वे आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए रणनीति बनाई जा रही है, लेकिन अभी तक कुत्तों की संख्या और उनके नियंत्रण की दिशा में ठोस योजना लागू नहीं की गई है। आम लोगों का कहना है कि उन्हें सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है।
ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा और नियंत्रण
स्थानीय ग्रामीण और परिजन प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इसी तरह की और भी घटनाएं हो सकती हैं। बच्चे की मौत से आसपास के इलाकों में भय का माहौल है और लोग अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतराने लगे हैं।
सवाल उठे कानून और नीति पर
इस घटना ने कुत्तों के नियंत्रण के तरीकों, पशु कल्याण और जनता की सुरक्षा के बीच संतुलन के सवाल को फिर से उभार दिया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों के प्रति सख्त नीति अपनाने की जरूरत है, जबकि पशु अधिकार संगठन इसके मानवीय विकल्पों पर जोर देते हैं। इस घटना ने सरकार और समाज के लिए इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित किया है।






