अभिव्यक्ति की कीमत? सलीम वास्तिक पर हमले ने खड़े किए बड़े सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। आज सुबह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज वारदात सामने आई, जिसमें चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर अज्ञात हमलावरों ने गोली, चाकू और भयानक तरीके से हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज जारी है। घटना ने न केवल स्थानीय इलाके में बल्कि पूरे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इंटरनेट पर विचार-आज़ादी और धार्मिक असहिष्णुता के सवालों को उभार दिया है।
घटना गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र की अशोक विहार/अली गार्डन कॉलोनी में हुई, जहां सलीम वास्तिक अपने घर के समीप बने छोटे कार्यालय में बैठे थे। सुबह लगभग 9:00 बजे दो अज्ञात व्यक्तियों ने बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल पर आकर ऑफिस के भीतर प्रवेश किया। दोनों ने हेलमेट पहना हुआ था, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो रही है। आरोपियों ने सलीम पर अचानक चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, जिनमें प्रमुख रूप से गर्दन और पेट पर कई चोटें शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि गला काटने का प्रयास किया गया।
हमलावर घटना के तुरंत बाद फराम होने में सफल रहे, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों तथा परिवार के सदस्यों ने उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में रेफर कर दिया गया। चिकित्सीय सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति गंभीर है।
परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज तथा आसपास के कैमरों की जांच शुरू कर दी है। गाजियाबाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की हैं और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।
हालांकि पुलिस ने अभी हमले के पीछे की सटीक वजह का खुलासा नहीं किया है, लेकिन प्रारंभिक जांच सभी संभावित एंगलों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
सलीम वास्तिक भारतीय यूट्यूब और सोशल मीडिया पर सक्रिय एक कंटेंट क्रिएटर हैं। उनके चैनल और वीडियो पर विशेष रूप से धार्मिक विषयों पर तीखी टिप्पणियाँ और व्याख्याएँ होती हैं। वे खुद को पूर्व मुस्लिम (एक्स मुस्लिम) के रूप में बताते हैं और इस्लाम धर्म सहित कुछ धार्मिक परंपराओं—जैसे हलाला आदि—पर अपनी आलोचनात्मक राय रखते रहे हैं।
उनके विचार अक्सर विवादों का विषय रहे हैं और उन्हें पहले भी धमकियाँ मिलने की बात सामने आई है। उनके समर्थकों और आलोचकों के बीच व्यापक मतभेद देखने को मिलते हैं, और कई लोग उनके विचारों को व्यक्तिवाद और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के रूप में देखते हैं, वहीं कुछ समुदायों के हिस्सों द्वारा उनका विरोध भी होता रहा है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ लोगों ने हमले की निंदा करते हुए सलीम के प्रति संवेदना जताई, तो वहीं कुछ कमेंट्स में उग्र और नकारात्मक अभिव्यक्ति भी देखी गई है। कुछ प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे यूज़र्स भी पाए गए जिन्होंने आश्चर्यजनक रूप से हमले पर “हाहा” जैसे प्रतिक्रियाएँ दीं, जिससे यह संघर्ष और सामाजिक विभाजन की ओर इशारा करता है।
यह विभाजन यह दिखाता है कि ऑनलाइन स्पेस पर भी विचारों और धार्मिक भावनाओं को लेकर कितनी तीव्र प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलती हैं, और किस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म सामाजिक दृष्टिकोणों को प्रभावित करते हैं।
यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं की संवेदनशीलता, और सोशल मीडिया पर विचार-आज़ादी की सीमा पर एक गहन बहस खड़ी करती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित है, लेकिन इसके साथ ही यह जिम्मेदारी भी आती है कि किसी समुदाय या समूह की भावनाओं का सम्मान किया जाए, जिससे सामाजिक सौहार्द कायम रहे।
इस घटना ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या विचारों के खुलकर अभिव्यक्ति और आलोचनात्मक टिप्पणी सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोणों से टकराव का कारण बन सकती है, और समाज में सहिष्णुता को कैसे बनाए रखा जाए। पुलिस जांच का निष्कर्ष आने और आरोपियों की पहचान के पश्चात ही वास्तविक निहित कारणों पर निश्चित निष्कर्ष तक पहुँचना संभव हो पाएगा।
गाजियाबाद में यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए हालिया हमले ने न सिर्फ एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा को प्रश्न में डाला है, बल्कि यह सोशल मीडिया, धार्मिक टिप्पणी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच कठिन संतुलन की चुनौतियों को सामने रखता है। घटना की गहनता, पुलिस जांच की प्रगति और समाजिक प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि इसके परिणाम कई स्तरों पर फैल सकते हैं कानूनी, सामाजिक और नैतिक। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और तथ्य सामने आएंगे, यह मामला भारतीय लोकतंत्र के मूलभूत अधिकारों तथा सामाजिक सौहार्द की कसौटी पर और अधिक रोशनी डालेगा।






